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Monday, March 9, 2026

भेदभाव मिटाने को शिक्षा और संविधान-कानून की समझ जरूरी

 

अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर कार्यक्रम सम्पन्न

महिलाओं ने बेटी-बेटों को समान शिक्षा देने की ली प्रतिज्ञा

चन्दौली डीडीयू नगर। अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर रविवार को सायंकाल हिनौली गांव में राष्ट्रीय सामाजिक संस्था शी मूवमेंट फाउंडेशन द्वारा महिला वर्तमान और भविष्य की चुनौतियां विषय पर परिचर्चा आयोजित की गयी। महिलाओं ने चर्चा में हिस्सेदारी करते हुए कहा कि पैदा होने से लेकर मृत्यु तक महिलाओं का जीवन चुनौतियों भरा होता है। आज भी बेटियों-महिलाओं को घर में पूरे हक और अधिकार भी नहीं मिलते। आज भी सामाजिक और आर्थिक मोर्चे पर व्यावहारिक रूप से भेदभाव होता है। सबसे बड़ी चुनौती एक स्त्री होने के नाते समानता और आर्थिक स्थिरता है। आज भी बेटी की पढ़ाई और उसकी काबिलियत को नजरअंदाज किया जाता है। पढ़ी-लिखी बहू को घर में बैठा दिया जाता है। समानता की स्थिति देखें तो ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ अब तो शहरी महिलाओं के साथ भी भेदभाव साफ दिखायी देने लगा है। संविधानऔर कानून की स्पष्ट जानकारी न होने से अक्सर पुरूष वर्ग हमे अवसर नहीं देता।

संस्था की तरफ से वक्ताओं ने कहा कि चुनौतियां हैं लेकिन जागरुकता और कानून की समझ जरूरी है। यदि जागरूक हैं तो बेटी को अच्छी शिक्षा दिलाकर उसे काबिल बनाया जा सकता है। बेटी-बेटा दोनों की समझ को बनाया और बढ़ाया जाना चाहिए। घर के अन्दर और बाहर समाज में अवसर पैदा करके पुरूष वर्ग की सोच को बदला जा सकता है। कानून की अच्छी समझ होने से शासन-प्रशासन को भी स्त्री वर्ग की जरूरतों से अवगत कराया जा सकता है। संविधानऔर कानून की समझ से हर महिला अपनी शक्ति बढ़ा सकती है। अन्त में परिचर्चा में इस बात पर सहमति जतायी गयी कि आज अवसर से पूर्व अपनी पूरी तैयारी होनी चाहिए, अच्छे कार्य करने वालों को समर्थन होना चाहिए, हर स्त्री एक-दूसरे को मदद करे और बेटियों को गुणवत्तायुक्त उच्च शिक्षा जरूर दिलायी जाए। परिचर्चा में आशा देवी, उमरावती, शैलजा कुमारी, छाया कुमारी, सविता देवी, सरिता, गीता मौर्या, संजय प्रसाद, मनोज, अमित, संस्था की ओर से सिद्धार्थ, यासिर जावेद, मरियम, अधिवक्ता शिवम यादव, रामाशीष यादव एड आदि मौजूद थे।



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