वाराणसी महात्मा गौतम बुद्ध के जीवन दर्शन से प्रेरणा लेकर पिछले 21 मई से 10 दिनों तक अनवरत चलने वाली काव्य गोष्ठी में डॉक्टर सत्य प्रकाश की प्रेरणा से अनेकों कवि और रचनाकार अपनी प्रस्तुति दे चुके हैं.अनवरत चलने वाली छठवीं कार्यशाला की शुरुआत सीमा से निवृत्ति प्राप्त कवि हरीश शुक्ला जी की रचना से हुआ था. गौतम बुद्ध के जीवन परिचय के रूप में अनेकों साहित्यकारों ने अपनी बात रखी और समाज को गौतम बुध के द्वारा दिए गए विचारों से किस प्रकार से वर्तमान के समय मानव जाति को प्रेरणा लेनी चाहिए, इसको बताने का प्रयास किया जा रहा है. अभी तक प्रस्तुति दे चूके कवियों मे रचना वशिष्ठ, रश्मि लता मिश्रा, सरिता कटिहार,डॉ अरुणा पाठक, ममता खरे झरना माथुर, शिखा गर्ग, अलका शर्मा, प्रमिला शर्मा, उमा शर्मा, क्षमा द्विवेदी, सुदर्शन शर्मा, ज्योत्सना शर्मा, रश्मि सक्सैना, अरविंद असर, श्रीधर द्विवेदी, कमल किशोर मिश्र, वंदना विशेष गुप्ता, गया प्रसाद मौर्य जी, सुभाषिनी गुप्ता , ज्योत्सना सिंह जी ने अपनी प्रस्तुति दी. आज के कार्यक्रम में डॉ नरेन् सचदेवा, राजीव खरे, सत्यनारायण तिवारी, डॉक्टर युवराज सिंह, डॉ विजय शंकर, साबिर परवेज ने डॉक्टर सत्य प्रकाश के शिक्षा अभियान को अपना समर्थन दिया और बहुत ही सुंदर रचनाओं से इस कार्यक्रम क़ो सफलतम बनाने का प्रयास किया. आज कार्यक्रम में लखनऊ से रेखा बोरा जी ने जुड़कर सभी का आभार प्रकट किया. पिछले 425 दिनों से चल रही सर्व शिक्षा अभियान की कार्यशाला को अपना समर्थन देने के लिए निदेशक डॉक्टर अंगद धारिया जी, पूर्व सांसद डॉ ओमपाल सिंह निडर जी और बेंगलुरु से जुड़ी डॉक्टर इंदु झुनझुनवाला जी ने 30 तारीख को समापन के अवसर पर ऑनलाइन जुड़ने का विश्वास जताया है. डॉक्टर सत्य प्रकाश को विश्वास है कि आने वाले समय में फेसबुक के माध्यम से इन छोटी-छोटी वीडियो के द्वारा जो शिक्षा का संदेश बनाया जा रहा है वह डिजिटल लाइब्रेरी के रूप में समाज में संस्कार और शिक्षा के नए कल को तैयार करने के लिए एक माध्यम बनेगा. स्ट्रेस मैनेजमेंट और पर्सनालिटी डेवलपमेंट की विभिन्न कार्यशालाओं को चलाने वाले वैज्ञानिक डॉक्टर सत्य प्रकाश, महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी के जीवन से प्रेरणा लेकर, काशी हिंदू विश्वविद्यालय मे वैज्ञानिक रहते हुए भी इस तरह के सोशल मीडिया इंटरवेंशन को अपने रिसर्च का हिस्सा बनाये है. पिछले 1 साल के कार्यों की रिपोर्ट को बहुत ही अच्छी तरीके से तैयार करके सरकार के सामने प्रस्तुत करने की योजना है, जिससे इस कार्यक्रम को अगले स्तर तक पहुंचाया जा सके. नारी सशक्तिकरण के इस कार्यक्रम में अनुज्ञा साहित्य सम्मान के द्वारा अपने जीवन में दूसरा प्रारंभ करने वाली महिलाओं को भी सम्मानित किया जाता है तथा बच्चों के लिए प्रतियोगिताओं के माध्यम से उनमें गुणवत्तापूर्ण सुधार और उनका प्रोत्साहन करके कल के अच्छे भारत के लिए भी डाली जा रही है.
इतने कम समय में कार्यक्रम में अनेकों बुद्धिजीवियों का जुड़ना, यह बताता है कि इस दिशा में चलने की शुरुआत हो चुकी है. बहुत जल्द अगले चरण पर भी काम होगा. व्यक्ति से समष्टि तक की इस यात्रा मे जुड़े सभी साहित्यकार डॉक्टर सत्य प्रकाश के द्वारा राष्ट्र शिक्षक के रूप में सम्मानित किए जाते हैं वर्तमान की परिस्थितियों में चिंता को दूर करने के लिए उनका योगदान एक मनोवैज्ञानिक के रूप में भी है।

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