चन्दौली चकिया वन विभाग की कार्रवाई तथा चकिया तहसील प्रशासन की वादा खिलाफी के खिलाफ भाकपा(माले)का सामूहिक भूख हड़ताल दूसरे दिन भी जारी रही।भूख हड़ताल का नेतृत्व कर रहे भाकपा(माले) राज्य स्थाई समिति सदस्य तथा चंदौली जिला सचिव अनिल पासवान ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लाए गए गुलामी के दस्तावेज 4 श्रम कोड तथा मनरेगा को खत्म करने की कार्यवाही के खिलाफ आयोजित अखिल भारतीय आम हड़ताल का भाकपा(माले) समेत तमाम वामपंथी संगठन समर्थन करेंगे तथा 12 फरवरी को हजारों की संख्या में चकिया की सड़कों पर मार्च करेंगे।
माले जिला सचिव ने कहा कि भारत सरकार ने विकसित भारत ग्रामीण रोजगार आजीविका मिशन नामक कानून बनाकर मनरेगा कानून को खत्म कर दिया है। जिसके तहत ग्रामीणों को 100 दिन के रोजगार की गारंटी का प्राविधान था। लेकिन नए कानून में केंद्र सरकार मनमर्जी से अपने पसंद के क्षेत्र को अधिसूचित करेगी। जाहिरा तौर पर राज्यों से भेदभाव करेगी ।बजट का 40 परसेंट हिस्सा राज्यों पर थोंप दिया गया है। और व्यस्त मौसम का बहाना लेकर 2 महीने तक काम न देने का कानून बना दिया गया है। इससे मनरेगा कानून का जो मूल अंतरात्मा थी कि प्रत्येक ग्रामीण गरीब अपने आवश्यकता के अनुसार कभी भी काम मांग सकता था,को मार दिया गया है। इससे ग्रामीण भारत में पलायन, विस्थापन और गरीबी बढ़ेगी जो भारत के संविधान के मूल उद्देश्य / प्रस्तावना के खिलाफ होगा। इसी तरह से 4 श्रम संहिता लागू कर बड़े पूंजी पतियों व उद्योगपतियों को खुली छूट दे दी गई है कि वे अपने मुनाफा के लिए मनमानी तरीके से काम का घंटा तय करें मजदूरी तय करें और जो भी मजदूरों की सुरक्षा/संरक्षा के लिए कानून बना था उसको खत्म कर दिया गया है। यही वजह है कि अखिल भारतीय स्तर पर मजदूर संगठनों ने अखिल भारतीय आम हड़ताल की घोषणा की है जिसे भाकपा(माले)समेत सभी वामपंथी पार्टियों समर्थन करती हैं और सड़कों पर उतरेंगी।कामरेड अनिल पासवान,कामरेड सुनैना कुमारी, कामरेड रामबचन वनवासी, कामरेड प्रेम चौहान,कामरेड पार्वती बनवासी कामरेड दशरथ राम,कामरेड सुरेश राम,कामरेड सुदामा राम तथा कामरेड कमला चौहान दूसरे दिन भी भूख हड़ताल पर बैठे रहे।

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