चकिया चन्दौली सोमवार को वामदलों ने संयुक्त रूप से काली जी पोखरे से उप जिलाधिकारी कार्यालय तक प्रतिवाद मार्च किया तथा महामहिम राष्ट्रपति को संबोधित अपना 12 सूत्रीय ज्ञापन नायब तहसीलदार को सौंपा।इस दौरान सभा को संबोधित करते हुए वामपंथी नेताओं ने कहा कि उत्तर प्रदेश सहित देश में लोकतांत्रिक अधिकारों पर हो रहे हमलों, गैरकानूनी बुलडोजर राज, फर्जी मुकदमों में आरोपी बनाने, राजनैतिक अधिकारों का प्रयोग न करने देने और जन आन्दोलनों व प्रदर्शनों से पहले नेताओं को नजरबंद करने की हो रही घटनाओं ने इस बात को साबित किया है कि सरकार तानाशाही पर उतर गई है।बदले की भावना से विपक्षी दलों के नेताओं को धमकाना संवैधानिक अधिकारों पर हमला है।वामपंथी नेताओं ने आगे कहा कि उत्तर प्रदेश में योगी सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उलंघन करते हुए अल्पसंख्यक, दलित-आदिवासी विरोधी बुल्डोजर अभियान यथावत चल रहा है। भाजपा से असहमति रखने वाले, सोशल मीडिया पर पोस्ट करने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं व बुद्धिजीवियों का दमन करके फर्जी मुकदमें लगाकर जेल भेजा जा रहा है। अपने हक-अधिकार के लिए संघर्ष करने वाले मजदूरों को जेलों में कैद कर दिया गया है। किसी भी लोकतांत्रिक कार्यक्रम को संचालित करने की अनुमति नहीं है। लोकतांत्रिक प्रदर्शन से पूर्व नेताओं व कार्यकर्ताओं को अवैध हाउस अरेस्ट करना आम नियम बना दिया गया है। महिलाओं व दलितों के खिलाफ हिंसा की एक से बढ़कर एक घटनाएं हो रही हैं। अपराधियों को सत्ता का वरदहस्त प्राप्त है। गैरकानूनी एनकाउंटर को खुली छूट है। जन-मानस में भय का माहौल है। अभी राममंदिर के दान व चढ़ावे में उजागर हुई कथित लूट से जनता की धार्मिक भावनाओं को काफी ठेस पहुंचा है।
वामपंथी नेताओं ने मांग करते हुए कहा कि मेरठ की दलित छात्रा ललिता गौतम के हत्याकांड में न्याय की मांग करने वाले परिजनों व प्रदर्शनकारियों से बर्बर, मनुवादी, हिंसक व गैर-संवैधानिक बर्ताव करने वाले एसएसपी अविनाश पांडेय को तत्काल निलंबित कर कड़ी सजा दी जाए,करीब दो दर्जन छात्रों की जान लेने वाले नीट पेपर लीक मामले में जवाबदेही तय हो, जंतर-मंतर पर चल रहे सीजेपी, आइसा सहित छात्र-युवा संगठनों के आंदोलन व भूख हड़ताल की मांगों को माना जाए; शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लिया जाए और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी एनटीए को भंग किया जाए,अयोध्या कथित चंदा चोरी मामले में लिपापोती बंद हो, विश्वसनीय जांच कराई जाए, जवाबदेही तय की जाए, सभी दोषियों को कड़ी सजा दी जाए और आरएसएस के नियंत्रण वाले मंदिर ट्रस्ट को भंग किया जाय,प्रदेश में दलितों, गरीबों, आदिवासियों व अल्पसंख्यकों पर बुलडोजर चलाना बंद हो। गैरकानूनी बुलडोजर राज पर रोक लगे। बुल्डोजर कार्रवाई से पीड़ित परिवारों का समुचित पुनर्वास किया जाए तथा मुआवजा दिया जाए। प्रदेश में सरकारी व वन विभाग की जमीनों पर आबाद भूमिहीनों, दलितों, आदिवासियों को उन जमीनों का मालिकाना हक दिया जाए, नोएडा सहित अन्य जगहों पर हुए मजदूर आंदोलनों में गिरफ्तार सभी मजदूरों, सामाजिक कार्यकर्ताओं व समर्थक बुद्धिजीवियों को रिहा किया जाए और फर्जी मुकदमें हटाये जाएं, जन आंदोलनों से ठीक पहले नेताओं-कार्यकर्ताओं को हाउस अरेस्ट करने, नजरबंद करने और गैरकानूनी हिरासत में रखने की प्रदेश में चल रही शासकीय कार्रवाइयों पर कड़ाई से रोक लगाई जाए। शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने के संवैधानिक अधिकार पर कोई भी पाबंदी अस्वीकार्य है,प्रदेश के सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली, प्रयागराज, चित्रकूट, बांदा आदि जिलों में रह रहे कोल, मुसहर, बियार, गोंड आदि आदिवासी समुदायों को जनजाति (एसटी) का दर्जा दिया जाए। इन जातियों को वनाधिकार कानून के दायरे में शामिल कर वनाधिकार कानून 2006 को लागू किया जाए,दलित उत्पीड़न की घटनाओं के लिए जिलाधिकारी (डीएम) व पुलिस अधीक्षक (एसपी) की सीधी जिम्मेदारी तय की जाए,प्रदेश में महिला हिंसा व उत्पीड़न की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार को विशेष कदम उठाने के लिए निर्देशित किया जाए। बलात्कारियों, अपराधियों को संरक्षण देने व सम्मानित करने पर कड़ाई से रोक लगाई जाए।
मार्च तथा ज्ञापन देने वालों में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी जिला सचिव शंभू नाथ यादव भाकपा(माले)जिला सचिव अनिल पासवान,किसान सभा जिला अध्यक्ष लालचंद यादव,खेग्रामस जिला सचिव रामायण राम,एडवा नेत्री लालमणि विश्वकर्मा,आइसा कार्यकर्ता क्रांति पासवान, आर वाई ए राज्य कौंसिल सदस्य सुनैना कुमारी, एपवा जिला काउंसिल सदस्य बैजंतीमाला, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, रामनिवास पांडे नारद मुनि विश्वकर्मा,जय नाथ राम सहित तमाम वामपंथी कार्यकर्ता शामिल रहे।


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