गाजीपुर: बसपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व सांसद अफजाल अंसारी ने कहा कि सत्ता के नशे में बीजेपी ने राज्यसभा चुनाव के अवसर पर जिस तरह विधायकों को मत डालने से रोका वह अलोकतांत्रिक है। उसका यह कदम हुकुमशाही के तरफ बढ़ रहा है। हुकुमशाही का दूसरा रुप ही तानाशाही होता है। उन्होने कहा कि राज्यसभा चुनाव में मतदान के लिए निर्वाचन आयोग व न्यायिक अभिरक्षा में जिन पांच न्यायालयों में मुकदमे विचाराधीन है उन्होने भी मुख्तार अंसारी को मतदान के लिए अनुमति दे दी थी। सीबीआई कोर्ट दिल्ली, एसटी/एससी स्पेशल कोर्ट, स्पेशल कोर्ट गाजीपुर, सत्र न्यायाधीश गैंगेस्टर कोर्ट मऊ आदि न्यायालयों ने 23 मार्च को होने वाले राज्यसभा चुनाव में मतदान हेतु अनुमति देकर डीएम, एसपी व जेल अधीक्षक को यह निर्देश दिया था कि विधायक मुख्तार अंसारी को सुरक्षा के बीच लखनऊ तिलक हाल में मतदान प्रक्रिया में भाग लेने के लिए भेजा जाये। श्री अंसारी ने कहा कि राज्य सरकार उच्च न्यायालय में तथ्यों को छिपाकर यह याचिका दाखिल किया कि मात्र एक न्यायालय एससी/एसटी एक्ट स्पेंशल कोर्ट गाजीपुर ने ही मतदान की अनुमति दी है और गाजीपुर कोर्ट ने राज्यसभा के पक्ष को भी नही सुना है। इसलिए गाजीपुर कोर्ट के आदेश का स्थगित किया जाये। जिसपर उच्च न्यायालय ने गाजीपुर कोर्ट के आदेश का स्थगित कर दिया। श्री अंसारी ने कहा कि राज्य सरकार ने जान-बूझकर यह तथ्य छिपया कि केवल एक न्यायालय ने अनुमति दिया है बाकि चार न्यायालयों ने अनुमति नही दिया है। जबकि यह सरासर झूठ है। राज्य सरकार ने जान-बूझकर अपने नाजायज मंशा को पूरा करने के लिए झूठ बोला है। उच्च न्यायालय को गुमराह किया है। यहां तक कि राज्य सरकार ने यह भी तथ्य छिपाया कि भारत के निर्वाचन आयोग ने भी विधायक मुख्ता्र अंसारी को मतदान के लिए अनुमति दी है। उन्होने भाजपा के चरित्र पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसी राज्य सभा चुनाव में झारखंड में दो एमएलए बंद हैं उन्हे वोट करने के लिए अनुमति प्रदान की गयी। यह भाजपा का कैसा दोहरा चरित्र है जो समझ से परे है। देश के लोकतंत्र की स्थापना, संविधान और संविधान सम्मत कानून पर निर्भर है। एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि बिना किसी न्यायालय द्वारा दोष सिद्ध घोषित हुए भी अपने मतदान के अधिकार से वंचित कर दिया जाये तो यह स्पष्ट होता है कि अब देश लोकतंत्र की व्यवस्था के बजाये हुकुम तंत्र की व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। श्री अंसारी ने बताया कि मुख्तार अंसारी के जेल में रहते हुए न्या्यालय से अनुमति लेकर विधान परिषद या राज्य सभा सदस्यों के लिए मतदान में अपने मत का उपयोग करते रहे हैं। इतना ही नही राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के चुनाव में मुख्तार अंसारी ने न्यायालय से अनुमति लेकर जेल से आकर मतदान किया था। यह एक परम्परा को बीजेपी के लोगों ने जन्म दिया है जो अपने लिए भविष्य का गड्ढा खोद लिये हैं। उनकी यह साजिश है कि बीएसपी के प्रत्यशी भीमराव अंबेडकर को हराकर 2019 के आम चुनाव में विपक्ष एकता को खंडित करने में सफल होंगे। जबकि इस घटना से विपक्षी एकता और मजबूत होकर भाजपा को मुंह तोड़ जवाब देंगे।
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