छुटे हुए तीन लाख से अधिक बच्चों का होगा टीकाकरण - सीएमओ
चदौली में छुटे हुए शून्य से पांच वर्ष तक के बच्चों के लिए विशेष टीकाकरण अभियान नौ जनवरी से शुरू किया जाएगा । इसको सफल बनाने के उद्देश्य से छूटे हुए बच्चों का शत-प्रतिशत नियमित टीकाकरण किया जाएगा जो 24 मार्च तक चलेगा | यह कहना है मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ वाई के राय का |
सीएमओ डॉ राय ने कहा कि इस अभियान में स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी आशा कार्यकर्ताओं सहित अन्य स्वास्थ्यकर्मियों का सहयोग लिया जाएगा| जनपद में इस समय शून्य से पांच वर्ष तक के 3 लाख 30 हजार बच्चे हैं | जिले की कुल 1885 आशा कार्यकर्ता को अपने-अपने क्षेत्र में सर्वे करने से संबंधित स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रशिक्षित करने का कार्य किया जा रहा है | इसका सत्यापन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी कर रहे हैं |
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ अमित दुबे ने बताया कि यह अभियान तीन चरणों में चलेगा । प्रथम चरण 9 से 20 जनवरी और द्वितीय चरण 13 से 24 फरवरी एवं तृतीय चरण 13 मार्च से 24 मार्च तक चलाया जायेगा| जनपद के समस्त शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में सभी 0 से 5 वर्ष के बच्चों को सूचीबद्ध कर जिले के सभी स्वास्थ्य केन्द्रों पर उनकी टीकाकरण की स्थिति का आंकलन करते हुये छूटे हुए बच्चों को चिह्नित किया जा रहा है | ई-कवच पोर्टल से जनरेटेड ड्यू लिस्ट की सूची के अनुसार लाभार्थियों को एएनएम व आशा कार्यकर्ता सत्रों पर टीकाकरण करेंगी । साथ ही बच्चों को छूटे हुये टीकों से आच्छादित करते हुये टीकों की सूचना ई कवच पोर्टल पर अपलोड की जाएगी|
डॉ दुबे ने बताया कि बच्चों को गंभीर बीमारियों से बचाने के लिए नियमित टीकाकरण आवश्यक है। बच्चों में होने वाली बीमारियों व संक्रमण का असर तेजी से उनके शरीर पर होता है और उनके अंगों को प्रभावित करता है। बीसीजी, हेपेटाइटिस ए, हेपेटाइटिस बी, डीटीपी, रोटावायरस वैक्सीन, इन्फ्लूएंजा व न्यूमोनिया जैसी गंभीर बीमारियों को नियंत्रित करने के लिए प्रतिवर्ष अभियान चलाया जाता है। उन्होंने बताया कि खसरा एक जानलेवा रोग है, जो कि वायरस से फैलता है। बच्चों में खसरे के कारण विकलांगता तथा असमय मृत्यु हो सकती है। इसी प्रकार रूबेला भी एक संक्रामक रोग है जो वायरस से फैलता है। इसके लक्षण खसरा रोग जैसे ही होते हैं। यह लड़के या लड़की दोनों को संक्रमित कर सकता है। गर्भवस्था के शुरू में ही सक्रंमित होने से महिला को कन्जेनिटल रूबैला सिन्ड्रोम हो सकता है। यह उसके भ्रूण तथा नवजात शिशु के लिए घातक सिद्ध हो सकता है। ऐसे में खसरा एवं रूबेला का टीका सुरक्षित है और इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं होते हैं।डॉ दुबे ने बताया कि शिशु के जन्म पर बीसीजी, हेपेटाइटिस-बी, ओपीवी, छठे हफ्ते (सवा महीने) पर बीओपीवी-1, पेंटावालेंट-1, एफएलपीवी-1,रोटा-1,पीसीवी-1, दसवां सप्ताह बीओपीवी-2, पेंटवालेंट-2 और रोटा-2, चौदहवें सप्ताह पर बीओपीवी-3, पेंटावालेंट-3, एफएलपीवी-2, रोटा-3 और पीसीवी-2, नौ से 12वें माह पर एमआर-1, जेई-1, पीसीवी-बी, विटामिन-ए की पहला खुराक, इसके बाद 16 से 24 माह पर एमआर-2, जेई -2, डीपीटी-बी 1, बीओपीवी-बी और विटामिन-ए की दूसरी खुराक और 5 से 6 वर्ष पर डीपीटी-बी 2 का टीका लगता है |

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