माले सांसद सुदामा प्रसाद ने मिर्जापुर में पीड़ित आदिवासी परिवारों से भेंट की
लखनऊ, 11 जनवरी। भाकपा माले ने बीएचयू में आइसा नेताओं और छात्रों को धरना-प्रदर्शन से पहले गिरफ्तार कर लेने की कड़ी निंदा की है। मनरेगा कानून की जगह मोदी सरकार द्वारा विकसित भारत-जी ग्रामजी कानून लाने के खिलाफ छात्र संगठनों के प्रदर्शन को न होने देने के लिए ये गिरफ्तारियां की गईं। पुराने कानून की तुलना में नया कानून ग्रामीण मजदूरों के हितों के खिलाफ है। छात्र संगठन मजदूरों के साथ एकताजुटता प्रकट करना चाहते थे। पार्टी ने गिरफ्तारियों को लोकतंत्र-विरोधी बताया है। आइसा नेताओं रोशन, राजेश, मिहिर सहित सभी की बिना शर्त रिहाई की मांग की है।
उधर, भाकपा (माले) के आरा से सांसद (लोकसभा सदस्य) सुदामा प्रसाद ने रविवार को मिर्जापुर जिले में वन विभाग की बुलडोजर कार्रवाई व पुलिस उत्पीड़न से प्रभावित तेंदुआ खुर्द व मतवार गांवों का दौरा किया। पीड़ित आदिवासी परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने न्याय दिलाने के लिए संसद के इसी महीने शुरु होने वाले बजट सत्र में आवाज उठाने का आश्वासन दिया। पार्टी के कार्यकारी राज्य सचिव ईश्वरी प्रसाद कुशवाहा व अन्य नेता सांसद के दौरे में साथ रहे। सांसद कल मिर्जापुर जेल में बंद भाकपा (माले) नेताओं और ग्रामीणों से भी मिलेंगे।

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