लखनऊ, यूपी भाकपा (माले) ने शिक्षण संस्थानों में जातीय भेदभाव के खिलाफ यूजीसी रेगुलेशन को लागू करने की मांग पर बुधवार को लखनऊ विश्वविद्यालय में शांतिपूर्ण समता मार्च निकाल रहे आइसा व अन्य संगठनों से जुड़े छात्रों को गिरफ्तार करने की निंदा की है। पार्टी ने इसे छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया है।
पार्टी के राज्य सचिव सुधाकर यादव ने कहा कि मार्च निकाल रहे छात्र जिलाधिकारी कार्यालय तक जाकर ज्ञापन देना चाहते थे। लेकिन उनके मार्च को परिसर के द्वार पर ही रोक दिया गया और छात्रों को पुलिस ने घसीटकर वाहन में ठूंस दिया। यहां तक कि छात्राओं के साथ भी यही सलूक किया गया।
माले नेता ने कहा कि भाजपा सरकार परिसरों में जातीय भेदभाव के खिलाफ समता की मांग कर रहे वंचित वर्ग के छात्रों की आवाज को बलपूर्वक दबाना चाहती है। इसीलिए सुप्रीम कोर्ट में यूजीसी रेगुलेशन पर सुनवाई के दौरान सरकार मौन रही और शीर्ष कोर्ट द्वारा इस पर 'स्टे' लगा दिया गया। छात्र इस रोक को हटाने और यूजीसी रेगुलेशन को और सशक्त बनाकर लागू करने की मांग कर रहे हैं। वे रोहित वेमुला एक्ट संसद से पारित करने की मांग भी कर रहे हैं, ताकि जातीय भेदभाव व उत्पीड़न पर प्रभावी रोक लगाई जा सके। यह मांग सिर्फ लखनऊ ही नहीं, देश भर से उठ रही है।
माले राज्य सचिव ने कहा कि दमन के बल पर वंचित छात्रों की इस न्यायपूर्ण व लोकतांत्रिक मांग को ज्यादा समय तक दबाया नहीं जा सकता। छात्र समुदाय और लोकतांत्रिक ताकतें इसे लड़कर हासिल करेंगे।

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