रिपोर्ट-त्रिपुरारी यादव
वाराणसी रोहनिया-जगतपुर स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्रांङ्गण में शुक्रवार को संस्कृत विभाग द्वारा संस्कृत भाषा उन्नयन हेतु दुर्गा सप्तशती के 'श्रीअर्गलास्तोत्रम् 'का अभ्यास छात्र छात्राओं को कराया गया। संस्कृत विभाग के डाॅ गोपेश्वर शास्त्री तथा उमा नाथ मिश्रा ने संकल्प विधि एवं विनियोग विधि का प्रयोग करना सिखाया।छात्र-छात्राओं ने उत्साह पूर्वक इस कार्यक्रम में प्रतिभाग किया।शुद्ध उच्चारण के प्रति उत्पन्न जिज्ञासाओं का समाधान किया गया छात्र छात्राओं ने प्रतिदिन अर्गला स्तोत्रम् पाठ को करने का संकल्प लिया ।इस अवसर पर संस्कृत विषय के अतिरिक्त अन्य विषय के भी छात्र-छात्राओं ने सप्तशती स्तोत्र का पाठ करना सीखा। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ निलय कुमार सिंह एवं हिन्दी विभागाध्यक्ष डाॅ रमेश चन्द्र पाठक ने छात्र-छात्राओं के संस्कृत भाषा सीखने के प्रति उत्साह को देखकर प्रशंसा की और निरन्तरता बनाए रखने के लिए प्रेरित किया।कार्यक्रम संयोजिका लक्ष्मी सिंह ने छात्राओं को प्रेरित करते हुए कहा कि समृद्ध वृक्ष की कामना करने के लिए सर्वप्रथम उसके 'बीज' को अंकुरित करते हैं,संस्कृत भाषा में व्याकरण 'बीज' है।इस प्रकार के अनुष्ठानों द्वारा संस्कृत के प्रति प्रेम बढेगा और सरलतम देव वाणी के लिए कि यह कठिन भाषा है यह मिथ भी टूटेगा।समाजशास्त्र विभाग की डाॅअमिता श्रीवास्तव ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
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