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Friday, November 19, 2021

बढ़ने लगी उम्मीदवारों की दौड़,सभी बता रहे हैं स्वयं को जीतता हुआ प्रत्याशी

                    

यूपी विधान सभा चुनाव -2022 के दृष्टिगत जनता में फिजा बनाने की पुरजोर कर रहे हैं कोशिश

नित नए-नए भावी प्रत्याशियों का हो रहा है आगमन

रिपोर्ट-राकेश यादव रौशन

चंदौली चहनियां  जैसे -जैसे यूपी विधानसभा-2022 का चुनाव नज़दीक आ रहा है, वैसे-वैसे ही विभिन्न दलों के भावी प्रत्याशियों की दौड़ जनता के बीच बढ़ती जा रही है। कोई अपने पूर्व के काम पर, तो कोई पार्टी के काम पर, तो कोई अपने जातिगत समीकरण के बल पर चुनावी वैतरणी पार करने की आस लगाए बैठा हैं। इतना ही नहीं कुछ तो वर्तमान विधायक की नाकामियों को गिनाकर ही चुनाव जीत जाने की बात कर रहे हैं। फरवरी- मार्च 2022 में संभावित यूपी विधान सभा के चुनाव की तैयारियां भावी प्रत्याशियों में दिखने लगी है। विधान सभा के मुख्य मार्गों और बाजारों में इनके विधान सभा 2022 को फ़तह करते पोस्टर आपको दिख जाएंगे। सकलडीहा विधानसभा के वर्तमान विधायक समाजवादी पार्टी के प्रभुनारायण सिंह यादव हैं, जो पुनः इसी दल से ताल ठोंक रहे हैं। अभी तक सकलडीहा विधानसभा में सर्वाधिक उम्मीदवार प्रदेश में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के हैं। इस पार्टी से इस बार सकलडीहा का विधायक बनने के लिए यूपी कोऑपरेटिव बैंक के पूर्व डॉयरेक्टर, जिला सहकारी बैंक वाराणसी चंदौली भदोही के पूर्व में अध्यक्ष रहे हैं और वर्तमान में उत्तर प्रदेश सहकारी आवास संघ लि. के अध्यक्ष दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री आरपी कुशवाहा, पूर्व विधान सभा प्रत्याशी सूर्यमुनि तिवारी, पूर्व सैनिक और मैक्सवेल हॉस्पिटल के डॉयरेक्टर केएन पांडेय, एलबीएस डिग्री कॉलेज के प्रोफेसर योगेंद्र नाथ ओझा, चन्दौली के पूर्व सांसद और यूपी के पूर्व शिक्षा मंत्री रहे स्व. प्रोफेसर कैलाश नाथ यादव के पुत्र विवेक कैलाशनाथ यादव, युवा नेता अरविंद पांडेय डॉक्टर, पूर्व में एक दल से लोकसभा का चुनाव लड़ चुके सैयद सरफराज पहलवान सहित आधा दर्जन से अधिक लोग टिकट की लाइन में खड़े हैं और इस संख्या के अभी आगे बढ़ने की उम्मीद है। कांग्रेस पार्टी के टिकट के लिए कांग्रेस के कद्दावर नेता, प्रदेश महासचिव और सकलडीहा पीजी कॉलेज छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष देवेंद्र प्रताप सिंह मुन्ना लाईन में हैं। पिछली बार भी ये कांग्रेस के प्रत्याशी थे। शिवपाल यादव की पार्टी प्रसपा से ज्ञानेंद्र यादव ज्ञानू के जिले भर लगे पोस्टरों को देखकर उनके भी प्रत्याशी होने के कयास लगाए जा रहे है। बसपा, आप और अन्य किसी भी दल के प्रत्याशियों का अभी तक कोई अता पता नहीं है। भाजपा के टिकट पर वर्ष 2017 के विधान सभा चुनाव में सूर्यमुनि तिवारी ने चुनाव लड़ा था, जो लगभग 65 हजार वोट पाकर दूसरे स्थान पर थे। ये इस बार पांच साल तक जनता के बीच उनके सुख दुख में शामिल रहने और रनर अप रहने के कारण अपनी दावेदारी कर रहे हैं। केएन पांडेय पूर्व सैनिक रहे हैं। वे अब अब सरहद से जनसेवा तक का सफर तय करने के लिए बेताब हैं। इनकी गिनती आर्थिक रूप से मजबूत उम्मीदवारों में की जा रही है। विवेक यादव अपने पिता स्व. कैलाशनाथ यादव के कार्यों के बल पर और कुछ जाति बाहुल्यता के कारण चुनाव जीतने की आस लगाए बैठे हैं। आरपी कुशवाहा पिछड़ा चेहरा माने जा रहे हैं। अपनी सादगी, सर्वसुलभता, चुनावी अनुभव, मौर्या बिरादरी, भाजपा के बेस वोट और ओबीसी की अन्य जातियों को एकजुट कर ये चुनाव जीतना चाहते हैं। योगेंद्र नाथ ओझा उर्फ राजू ओझा पेशे से शिक्षक हैं और पूर्व में जिला पंचायत सदस्य रह चुके हैं। अरविंद पांडेय डॉक्टर युवा भाजपा नेता हैं। इन्होंने कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर के सहयोग से दिव्यांगजनों और बलुआ घाट पर कई सराहनीय कार्य करवाए हैं। ये अपने इन्हीं कार्यों के दर्शाते हुए जनता से सेवा का मौका मांग रहे हैं। सैयद सरफराज पहलवान को अपनी मुस्लिम बिरादरी, दलित, पिछड़े और भाजपा के बेस वोटों पर भरोसा है। वैसे देखा जाय तो सकलडीहा विधानसभा (पूर्व नाम धानापुर विधानसभा) के इतिहास में आज तक यहां कमल नहीं खिला है। कांग्रेस पार्टी के देवेंद्र सिंह मुन्ना का व्यक्तिगत सम्बन्ध हर जाति के लोगों से मजबूत है। अलनी मजबूत पकड़ के चलते ही तमाम विरोधों के बावजूद ये अपनी पत्नी श्वेता सिंह को जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीतवा चुके हैं। इन सभी के बीच एक मजबूत जमीनी पकड़ वाले उम्मीदवार पूर्व ब्लॉक प्रमुख चहनियां उपेंद्र सिंह गुड्डू ने अपने पत्ते अभी नहीं खोले हैं। वे अभी तेल और उसकी धार देख रहे हैं। वैसे पिछले विधानसभा चुनाव 2017 में बसपा के टिकट पर इन्होंने एक सम्मानजनक लड़ाई लड़ी थी और तीसरे स्थान पर रहे थे। इनकी मजबूत पकड़ यादव सहित अन्य पिछड़ी, अगड़ी और नीचली जातियों में मानी जाती है। ये भी भाजपा का टिकट लेने के लिए प्रयासरत हैं और न मिलने पर किसी अन्य दल से भी चुनाव लड़ सकते हैं। वैसे गुड्डू सिंह की इतनी हैसियत मानी जाती है कि इन्हें राजनीतिक रूप से इग्नोर नहीं किया जा सकता। किसी भी व्यक्ति की जीत हार में ये बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। सभी उम्मीदवारों ने जनता में दौड़ की लगाना शुरू कर दिया है। तेरही, बरही, शादी, विवाह, जन्मदिन आदि किसी भी अवसर का निमंत्रण मिलने पर उसमें शामिल होने का मौका हाथ से नहीं जाने दे रहे हैं। पोस्टरों में ये स्वयं को सबसे योग्य, कर्मठ और जुझारू भी बता रहे हैं। अब देखना यह है कि जनता इनके जुझारुपन को कितना स्वीकार करती है।



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