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Sunday, October 2, 2022

19 बैनामों को तहसीलदार ने किया निरस्त,मचा हड़कंप

 

जांच में नियमावली का उल्लंघन आया सामने

रिपोर्ट-एस०बहादुर

चन्दौली नियामताबाद पीडीडीयू नगर तहसील क्षेत्र में गलत तरीके से जमीन खरीद बिक्री करना अब लोगों को भारी पड़ने लगा है।ऐसे ही 19 मामले पीडीडीयू नगर तहसील क्षेत्र में सामने आए हैं। जिनमें संबंधित लोगों ने बिचौलियों के जरिए अनुसूचित जाति के लोगों की जमीन खरीद ली। बिक्री होने से पहले जमीन को न तो अकृषि घोषित कराया न ही जिला प्रशासन से गैर अनुसूचित जाति के व्यक्ति को जमीन बेचने की अनुमति ही ली गई। नतीजा हुआ कि दाखिल-खारिज तो दूर, तहसीलदार विराग पांडेय ने बैनामे को ही निरस्त कर दिया। साथ ही उक्त जमीनों को राज्य सरकार में निहित करने की कार्रवाई भी शुरू कर दी। इससे हड़कंप मचा हुआ है।बताया जा रहा है कि तहसील क्षेत्र के 11 गांवों में गलत ढंग से जमीन बेजने पर मूल मालिक को भी नुकसान हुआ है। फिलहाल, इस तरह के 19 बैनामों को तहसीलदार ने निरस्त किया है। वहीं एसडीएम को अब संबंधित बैनामों वाली जमीनों को राज्य सरकार में निहित करने की कार्रवाई शुरू करने की रिपोर्ट दी है। तहसीलदार विराग पांडेय ने बताया कि संबंधित मामलों में क्रेता-विक्रेता को मौका दिया गया। लेकिन वे साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर पाए। जमीन बिक्री में उप्र राजस्व संहिता के नियमों का उल्लंघन होने की पुष्टि पर न्यायालय से कार्रवाई हुई है।


बिचौलिये बिकवाते हैं जमीन


पीडीडीयू नगर तहसील क्षेत्र के जिन गांवों की जमीन में नियमों का उल्लंघन हुआ है।वहां की जमीनें काफी कीमती हैं। इसमें बिचौलिया अनुसूचित जाति के व्यक्ति की जमीन को बिक्री कराने का ठेका लेते हैं। फिर वह खरीदारों की तलाश में लगते हैं। साथ ही विक्रेता से औने पौने दाम में जमीन तय करके अधिक दाम पर तथ्यों को छिपाकर बैनामा करा देते हैं। 


जांच में नियमावली का उल्लंघन आया सामने


संबंधित बैनामों की पत्रावली की जांच में पाया गया कि क्षेत्रीय लेखपाल की रिपोर्ट है कि वादी भूमि बिना अकृषि घोषित हुए अनुसूचित जाति के व्यक्ति से सामान्य जाति के व्यक्ति को विक्रय हुई है। भूमि विक्रय के संबंध में उप्र राजस्व संहिता 2006 की धारा 98 (1) नियमावली-2016 के तहत अनुमति प्राप्त नहीं की गई है। विक्रय पत्र (बैनामा) में भी अनुमति के संबंध में कोई जिक्र नहीं किया गया है। वादी भी संबंधित साक्ष्य न्यायालय में प्रस्तुत नहीं कर पाए है। ऐसे में वादी की भूमि को राज्य सरकार में निहित करने के लिए पत्रावली एसडीएम न्यायालय को प्रस्तुत हुई है।



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