रिपोर्ट-त्रिपुरारी यादव
वाराणसी-नमामि गंगे परियोजना के अंतर्गत ( महामना मालवीय गंगा शोध केंद्र बीएचयू ) से ईको-स्किल्ड गंगामित्र प्रशिक्षण प्राप्त कर टीम पिछले तीन वर्षों से गङ्गा के पांच पहलुओं (अविरल-गंगा, निर्मल-गंगा,अर्थ गंगा,आध्यात्मिक-गंगा व पारिस्थितिकी-गंगा)पर सदैव प्रयत्नशील है। गुरुवार को चंदौली जिले में ( डॉल्फिन-संरक्षण ) हेतु गंगामित्र टीम ने 15 नाविकों व जनमानस को किया जागरूक ।टीम कॉर्डिनेटर निधि तिवारी ने नाविकों व मल्लाहों को राष्ट्रीय जलीय जीव डॉल्फिन की महत्ता के बारे में विधिवत जानकारी दी कि इसका शिकार करना अपराध है । यदि किसी समय नदी में मछली पकड़ते हुए जालो या कटिया में डॉल्फिन फंस भी जाये यो इसे सही सलामत नदी में छोड़ देना चाहिए या वन्य जीव
अधिकारी को सूचित करें । गंगामित्रों कि बातों को अमल करते हुए मल्लाहों ने यह भी शपथ लिया कि हम सभी डॉल्फिन का संरक्षण करेंगे और लोगों को भी इसके प्रति जागरूक करेंगे ।जागरूकता के दौरान सब-कॉर्डिनेटर राधा मौर्या,कुमारी सीनू, रूपा पटेल, सक्षम तिवारी व कॉर्डिनेटर निधि तिवारी उपस्थित रही ।उल्लेखनीय है कि गंगामित्रों को संस्था के चेयरमैन प्रख्यात पर्यावरण वैज्ञानिक आदरणीय प्रोफेसर बीडी त्रिपाठी के निर्देशन में प्रशिक्षित किया गया है ।


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