रिपोर्ट -त्रिपुरारी यादव
वाराणसी आराजी लाइन विकासखंड क्षेत्र के शाहंशाहपुर स्थित भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान मे रविवार को किसान मेले का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कर्नल डॉ. बिजेंद्र सिंह कुलपति राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय अयोध्या रहें। उन्होंने सब्जी उत्पादन के क्षेत्र में संस्थान द्वारा किए जा रहे शोध एवं नवाचार कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि कृषि के समग्र विकास में सब्जी उत्पादन की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है । मुख्य अतिथि ने कहा कि यदि संस्थान संबंधित विभाग समन्वय के साथ जिले के कुछ गाँवों को गोद लें तो उन्हें सब्जी उत्पादन में आदर्श गाँव के रूप में विकसित किया जा सकता है । आज समय की सबसे बड़ी मांग किसानों की आमदनी को बढ़ाना है | उन्होंने किसानों से खेती के तरीके में बदलाव की अपील की और आग्रह किया की जल, जमीन एवं जलवायु की शुद्धता बनाये रखने की आवश्कता है ताकि आने वाली अगली पीढी को सुरक्षित कृषि सौंपी जा सके | इस दौरान उन्होंने किसानों से नई तकनीकों को अपनाने तथा जैविक कृषि की ओर बढ़ने का आह्वान किया । कार्यक्रम में पूर्वांचल के 19 एफपीओ के साथ संस्थान की तकनिकी हस्तांतरण का अनुबंध किया गया | कृषि जगत में विशेषकर सब्जी उत्पादन में बढ़िया खेती कर रहे किसानों अंजू चतुर्वेदी, अवनीश पटेल, राम बुझारत सिंह
एवं रिषम पटेल को पुरुष्कृत किया गया | एकीकृत बागवानी विकास मिशन परियोजना अंतर्गत एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने हेतु किसान रामरतन सिंह, अरुण सिंह, पप्पू गुप्ता, सर्वजीत सिंह एवं केदार यादव को इनपुट एवं तकनिकी सहायता प्रदान की गयी | इसके अलावा प्रदर्शनी में शामिल केवीके वाराणसी, जौनपुर आदि को सम्मानित किया गया | कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि डॉ. सुधाकर पाण्डेय, सहायक महानिदेशक (मसाले, औषधीय एवं सब्जी फसलें), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली ने कहा कि मैदानी क्षेत्रों में मसाला, औषधीय एवं सब्जी फसलों की व्यापक संभावनाएं हैं । वैज्ञानिक तकनीकों, गुणवत्तायुक्त बीजों एवं मूल्य संवर्धन से किसानों की आय बढ़ाई जा सकती है । साथ ही सरकार की प्राथमिकताओं को बताया | साथ ही कृषि में महिलायों के सहयोग एवं कृषि जी डी पी में 18% से अधिक सहयोग बताया । डॉ ए.बी राय, पूर्व विभागाध्यक्ष, सब्जी फ़सल सुरक्षा ने कहा कि कृषि को लाभकारी बनाने में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की भूमिका महत्वपूर्ण है । साथ ही बताया की केवल 10-12% की कीट एवं व्याधियां ही फसलों के लिए नुक्सान दायक होती है जबकी 90% से अधिक लाभकारी होते है।डॉ. यू.पी. सिंह, निदेशक, कृषि विज्ञान संस्थान, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी ने फसल विविधीकरण, मृदा स्वास्थ्य एवं जल संरक्षण पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई । डॉ. आलोक श्रीवास्तव, निदेशक, राष्ट्रीय कृषि उपयोगी सूक्ष्मजीव ब्यूरो, मऊ ने कृषि उपयोगी सूक्ष्मजीवों का संरक्षण, जैव-उर्वरक व जैव-नियंत्रक, मृदा स्वास्थ्य सुधार एवं पौध पोषण में सूक्ष्मजीवों की भूमिका, जैव विविधता, सतत एवं जैविक खेती को बढ़ावा एवं क्वालिटी कंट्रोल, ट्रेनिंग और क्षमता निर्माण पर ध्यान आकर्षित किया | इससे पूर्व संस्थान के निदेशक डॉ. राजेश कुमार ने मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथियों एवं किसानों का स्वागत किया । किसान मेले में आयोजित प्रदर्शनी में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के विभिन्न संस्थानों, कृषि विज्ञान केंद्रों के साथ-साथ सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थाओं ने सहभागिता की । प्रदर्शनी में उन्नत कृषि तकनीकों, बीजों, कृषि यंत्रों एवं प्रसंस्करण से संबंधित जानकारियां प्रदर्शित की गईं । मुख्य अतिथि ने प्रक्षेत्र एवं प्रदर्शनी का भ्रमण कर संस्थान द्वारा संचालित किसान हितैषी कार्यक्रमों की सराहना की । मेले के दौरान आयोजित किसान गोष्ठी में उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखण्ड के विभिन्न जनपदों से आए 2000 से अधिक किसानों ने भाग लिया एवं 30 से अधिक स्टाल भी लगाये गये | गोष्ठी में सब्जी उतपादन, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन एवं कृषि से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषय पर जानकारी दी गई ।


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