उपजिलाधिकारी के आश्वासन पर भाकपा(माले)की सामूहिक हड़ताल समाप्त
चन्दौली चकिया मजदूर विरोधी चार श्रम कोड के खिलाफ, मनरेगा की बहाली, बिजली निजीकरण के खिलाफ और अन्य मांगों को लेकर अखिल भारतीय आम हड़ताल के समर्थन में हजारों की संख्या में मजदूर किसानों ने गुरुवार को चकिया की सड़कों पर मार्च किया और गांधी पार्क पहुंचकर की सभा।सभा को संबोधित करते हुए वामपंथी नेताओं ने कहा कि भारत सरकार ने विकसित भारत ग्रामीण रोजगार आजीविका मिशन नामक कानून बनाकर मनरेगा कानून को खत्म कर दिया है। जिसके तहत ग्रामीणों को 100 दिन की रोजगार की गारंटी का प्राविधान था। लेकिन नए कानून में केंद्र सरकार मनमर्जी से अपने पसंद के क्षेत्र को अधिसूचित करेगी। जाहिरा तौर पर राज्यों से भेदभाव करेगी ।बजट का 40 परसेंट हिस्सा राज्यों पर थोंप दिया गया है। और व्यस्त मौसम का बहाना लेकर 2 महीने तक काम न देने का कानून बना दिया गया है। इससे मनरेगा कानून का जो मूल अंतरात्मा थी कि प्रत्येक ग्रामीण गरीब अपने आवश्यकता के अनुसार कभी भी काम मांग सकता था,को मार दिया गया है। इससे ग्रामीण भारत में पलायन, विस्थापन और गरीबी बढ़ेगी जो भारत के संविधान के मूल उद्देश्य / प्रस्तावना के खिलाफ होगा। इसी तरह से 4 श्रम संहिता लागू कर बड़े पूंजी पतियों व उद्योगपतियों को खुली छूट दे दी गई है कि वे अपने मुनाफा के लिए
मनमानी तरीके से काम का घंटा तय करें मजदूरी तय करें और जो भी मजदूरों की सुरक्षा/संरक्षा के लिए कानून बना था उसको खत्म कर दिया गया है। इसके खिलाफ हजारों की संख्या में मजदूर किसानों ने चकिया की सड़कों पर मार्च किया,यह इस बात को दर्शाता है कि आने वाले दिनों में सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ जन ज्वार बढ़ेगा और सत्ता को उखाड़ देते हैं।इसके आलावा भाकपा(माले) जिला सचिव कामरेड अनिल पासवान के नेतृत्व में 50 घंटे की भूख हड़ताल पर बैठे भाकपा(माले) कार्यकर्ताओं को उप जिलाधिकारी ने जूस पिलाकर भूख हड़ताल तुड़वाया।सभा को भाकपा(माले) राज्य स्थाई समिति सदस्य कामरेड अनिल पासवान,भाकपा नेता शिव मूरत राम जनवादी महिला समिति नेत्री लालमणि विश्वकर्मा किसान महासभा के नेता परमहंस राम,खेत मजदूर सभा के रामायण राम माले के विजई राम ने संबोधित किया। संचालन माकपा जिला सचिव कामरेड शंभू नाथ यादव तथा अध्यक्षता कामरेड सुखदेव मिश्र, परमानंद मौर्या तथा रामबचन वनवासी के तीन सदस्यीय अध्यक्ष मंडल ने किया। कार्यक्रम में राजेन्द्र यादव, रामनिवास पाण्डेय, बदरूद्वजा अंसारी, भृगुनाथ, नन्दलाल सहित बहुत से लोग मौजूद रहे।


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