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Tuesday, April 14, 2026

भाकपा (माले) ने मनाई बाबासाहेब अंबेडकर की 135वीं जयंती

 

लखनऊ, यूपी भाकपा (माले) ने भारतीय संविधान के शिल्पकार, सच्चे लोकतंत्र और सामाजिक न्याय के प्रणेता, बाबा साहेब डॉ. बी.आर. अम्बेडकर की 135वीं जयंती हर्षोल्लास के साथ समारोहपूर्वक पूरे प्रदेश में मनाई। इस मौके पर जगह-जगह उनकी मूर्तियों पर माल्यार्पण किया गया, मार्च और गोष्ठियां आयोजित की गईं। जातिविहीन समाज की रचना के उनके अधूरे सपनों को पूरा करने, शिक्षित बनने, संघर्ष करने और एकजुट होने की उनकी सीख पर अमल करने का संकल्प लिया गया। 

वक्ताओं ने कहा कि बाबासाहेब के विचार हमें आज भी स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। यह बाबा साहेब ही थे जिन्होंने भारत में बराबरी के समाज के निर्माण में जातिवाद को सबसे बड़ी बाधा और मनुस्मृति को इसका मूल स्रोत बताते हुए सन 1927 में मनुस्मृति का सार्वजनिक दहन किया था। छुआछूत की नृशंस और अमानवीय परंपरा के खिलाफ उनका संघर्ष इतिहास के स्वर्णाक्षरों में दर्ज है। 

वक्ताओं ने बाबासाहेब के विचारों को याद करते हुए कहा कि आज अपने प्रदेश व देश की सत्ता में जो ताकते हैं, वे बाबासाहेब के समर्थक होने का दावा करती हैं, जबकि इन सत्ताधारियों की पूरी सोच, दर्शन और कर्म बाबासाहेब के विचारों के पूरी तरह उलट है। संघ तो भारत को हिन्दू राष्ट्र ही बताता है, जबकि बाबासाहेब द्वारा रचित संविधान अस्तित्व में है और वह देश का संविधान है। जब संविधान लागू हो रहा था, तो यही संघ है जिसने इसका विरोध किया था और मनुस्मृति को ही देश का संविधान बना देने की वकालत की थी। 

लेकिन उसकी दाल नहीं गली। बाबासाहेब हिन्दू राष्ट्र की असलियत जानते थे, तभी उन्होंने कहा था कि भारत में हिन्दू राष्ट्र की स्थापना सबसे बड़ी विपत्ति होगी। संविधान लिखकर राजनीतिक बराबरी (एक व्यक्ति एक वोट) देने वाले बाबासाहेब की सबसे बड़ी चिंता सामाजिक बराबरी बनाने की थी और इसीलिए उन्होंने जातिप्रथा को समाप्त करने के लिए आजीवन संघर्ष किया। आज शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव के खिलाफ यूजीसी के समता नियम लागू करने की मांग बाबासाहेब के प्रगतिशील व लोकतांत्रिक विचारों से ही प्रेरित है।

वक्ताओं ने आगे कहा कि आज भाजपा सत्ता में है और येन-केन-प्रकारेण बाबासाहेब द्वारा रचित संविधान को कमजोर करने में जुटी है, ताकि संघ का प्रतिगामी सपना पूरा हो सके। यही नहीं, ये सत्तारूढ़ ताकतें संविधान द्वारा देश की स्थापित विदेश नीति को तक पर रखकर जंगखोर इजरायल से पींगें बढ़ा रही हैं और साम्राज्यवादी अमेरिका के तलुए चाटने का कृत्य कर रही हैं, जो शर्मनाक है।

वक्ताओं ने कहा कि लेकिन संघ-भाजपा को यह समझ लेना होगा कि जब तक बाबासाहेब द्वारा रचित संविधान मौजूद है, हिन्दू राष्ट्र का उनका सपना कभी पूरा नहीं होगा। अंबेडकर व भगत सिंह के वारिस, लोकतंत्र पसंद व न्यायप्रिय नागरिक और समतामूलक समाज के पक्षधर आम देशवासी ऐसा कभी नहीं होने देंगे। जिस तरह नाजीवादी हिटलर का सपना ध्वस्त हुआ, उसी तरह देश के फासिस्टों का भी सपना ध्वस्त होगा और विजय बाबासाहेब के सपनों की, वास्तविक लोकतंत्र, भाईचारा, स्वतंत्रता व समाजवाद की होगी।

राजधानी लखनऊ में भाकपा (माले), आइसा, एआईसीसीटीयू और आरवाईए के नेताओं ने संयुक्त रूप से हजरतगंज स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया। भाकपा (माले) के राज्य सचिव सुधाकर यादव ने सोनभद्र में आयोजित जयंती कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इसके अलावा, डॉ अंबेडकर जयंती समारोह प्रयागराज, अयोध्या, मिर्जापुर, सोनभद्र, चंदौली, वाराणसी, गाजीपुर, मऊ, आजमगढ़, बलिया, देवरिया, गोरखपुर, महाराजगंज, कुशीनगर, बस्ती, रायबरेली, प्रतापगढ़, भदोही, अंबेडकरनगर, सीतापुर, जालौन, कानपुर, मथुरा, लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, बरेली, शाहजहांपुर, मुरादाबाद, बिजनौर, सहारनपुर आदि जिलों में मनाया गया।



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