चंदौली जिले में ऐसे भी क्रय केंद्र हैं जहां आज तक गेहूं खरीद नहीं हुई।आरोप लगाया गया कि शिकारगंज कोआपरेटिव सोसाइटी पर पीसीएफ का सेंटर है जहां खरीद शून्य है।किसान गेहूं बेचने के लिए जाते हैं तो क्रय केंद्र प्रभारी कहता कि बोरे हमारे यहां नहीं हैं।आज तक सरकारी खरीद का बैनर भी नहीं लगाया गया है।जिले भर में बोरे की समस्या अधिक है।खास तौर से पीसीएफ,पीसीयू और यूपी एस एस के सेंटरों पर सर्वाधिक बोरों की समस्या है। पीसीयू सेंटर खरौझा,तियरी तथा पीसीएफ सेंटर इलिया में बहुत कम बोरे आये थे।बेचने के लिए किसान तैयार हैं मगर क्रय केंद्रों पर बोरे नदारद की बात सुनकर घर लौट रहे हैं।चकिया तहसील अंतर्गत गेहूं की खरीद फिसड्डी है।किसान विकास मंच के नेता सरोज कुमार ने बताया कि शिकारगंज क्षेत्र ऐसा है जहां कोई भी किसान अब तक बोरों के अभाव में सेंटर पर गेंहू नहीं बेंच पाया है।प्रगतिशील किसान आदित्य मौर्य ने बताया कि हम जब भी गेहूं बेचने के लिए गए तब एक ही जवाब मिलता है बोरे नहीं हैं। फार्मर रजिस्ट्री किसान आई डी के चक्कर में भी किसान पिसते रहे। जब हर पेपर ओके हो गया तो बोरों की समस्या सबसे बड़ी हो गई।मार्केटिंग के सेंटरों पर भी खरीद की गति बहुत धीमी है।किसान विकास मंच के संगठन मंत्री राम अवध सिंह ने कहा कि किसान से सेंटरों पर गेहूं नहीं खरीदा जा रहा है। सेंटरों पर दुर्व्यवस्था देखकर किसान बहुत चिंतित हैं,अगर सेंटरों की व्यवस्था सही होती तो कोई भी किसान औने पौने दाम पर व्यापारियों को नहीं बेंचता। सरकार के इस नाकामी का खामियाजा किसान भुगत रहे हैं। जिलाधिकारी द्वारा आश्वासन दिया जा रहा है कि बोरों की कमी नहीं होने दी जाएगी लेकिन हकीकत ठीक उल्टा है।किसान विकास मंच इस समस्या के निवारण के लिए प्रयासरत है। किसान विकास मंच के कार्यकर्ता उप जिलाधिकारी चकिया और जिलाधिकारी चंदौली से मिलेंगे।
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