चकिया चन्दौली जिला प्रशासन चाहे अथक प्रयास कर ले लेकिन हम नहीं सुधरेंगे तो नहीं सुधरेंगे,अगर कोई यह सोच ले तो उसे सुधारने की सारी कवायद फेल हो जाती है।जी हां इस समय जिला हास्पिटल चकिया में लगता है यही चल रहा है।मैनेजर के पूरी सक्रियता के बावजूद आज जांच रजिस्ट्रेशन के लिए बना काउंटर काफी देर तक खाली रहा जबकि मरीजों की कतारें लगी रहीं।दूसरी ओर जिलाधिकारी के द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की बातें कहना यहां थोड़ी बेमानी समझ में आती है।उधर हास्पिटल में ही आयुष्मान भारत के कमरे में दिन के 10 बजे के बाद तक ताला लटका रहा।मरीज दूर से ताला देखकर लौट रहे थे। हास्पिटल के ही कर्मचारियों का कहना था कि इसके प्रभारी चन्दौली से आते हैं थोड़ी देर से ताला खुलता है। ऐसी स्थिति में हास्पिटल प्रशासन को मरीजों के हक में सोचना होगा नहीं तो सरकार की स्वास्थ्य परक योजनाएं केवल मीटिंगों और कागजपूर्ति में प्रतीत होंगी।ऐसे गंम्भीर प्रकरणों पर ध्यान आकर्षित करने के बावजूद भी कोई कार्रवाई नहीं होती है तो यह स्पष्ट हो जायेगा की हास्पिटल प्रशासन कर्मचारियों से मैनेज है।
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