गाजीपुर: वर्तमान समय में भी नोटबंदी के समय जैसे हालात पैदा हो गए हैं। ग्रामीण क्षेत्र के बैंकों के करेंसी चेस्ट में नकदी समाप्त होने की ओर होने से प्रतिदिन की रकम निकासी को लेकर परेशानी उत्पन्न हो गई है। बैंक की कई शाखाएं एक लाख रुपये से कम का ही भुगतान कर रही हैं। इसके कारण जरूरतमंदों को नकदी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा हैं। ग्रामीण क्षेत्रों की शाखाओं में खाताधारकों को कहीं 10 हजार तो कहीं 20 हजार दिए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि, हालात फिर से बेकाबू हो गए हैं। शादी विवाह से सम्बंधित कार्य भी इसकी वजह से प्रभावित होता दिख रहा है। बैंक सूत्रों के अनुसार आरबीआई से ही मांग के अनुसार नकदी नहीं मिल रही है, जो मिल रही है वह मांग के 50 प्रतिशत से भी कम है। ऐसे में बैंक प्रबंधकों के सामने ग्राहकों की आवश्यकता के अनुसार नकदी उपलब्ध कराने की समस्या खड़ी हो गयी है। कई जगह स्थिति ऐसी भी हो गई है कि, बैंक उस दिन के जमा होने वाले रकम से ही भुगतान का काम चला रहे हैं। बैंक से नकदी नहीं मिलने का सीधा असर एटीएम पर पड़ता दिख रहा है। नंदगंज बाजार में विभिन्न बैंकों के करीब 5 एटीएम हैं। सूचना के मुताबिक इनमें से मात्र 2 एटीएम ही चल रहे हैं और उस पर भी पैसा निकालने वालों की लम्बी लाइन देखने को मिल रही है। स्टेशन रोड स्थित भारतीय स्टेट बैंक, इलाहाबाद बैंक व यूनियन बैंक की शाखा पर आए बाजार निवासी बब्बन सिंह, लखमीपुर के भरत कुशवाहा आदि ने बताया कि कई दिनों से बैंक का चक्कर लगाने के बावजूद पर्याप्त नकदी नहीं मिल पा रही है। आज भी तीन घंटे कतार में खड़े रहने के बाद जितनी जरूरत थी, उतनी नकदी नहीं मिल सकी। विनय कुमार सिंह ने बताया कि कई एटीएम में घूमने के बाद भी उन्हें नकदी नहीं मिली। नोटबंदी के समय जिस तरह नकदी की समस्या दिख रही थी। संभवतः उसी तरह की स्थिति फिर से आ गई है। यूबीआई के शाखा प्रबंधक ने बताया कि वर्तमान समय में आरबीआई से ही पर्याप्त नकदी नहीं मिल रही है। खाताधारकों से जो नकदी मिल रही है, उसी से काम चलाया जा रहा है। वहीं एसबीआई के शाखा प्रबंधक के अनुसार जल्द ही स्थिति में बदलाव होगा और लेनदेन सामान्य हो जाएगा।
रिपोर्ट: विवेक सिंह
रिपोर्ट: विवेक सिंह


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