गाजीपुर: नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र परिसर में स्वास्थ्य विभाग की ओर से लगी पानीटंकी करीब तीन वर्षों से शोपीस बनी हुई है। जिससे चिकित्सालय परिसर के बने आवासों में रहने वाले चिकित्सक, फॉर्मासिस्ट समेत 7 कर्मचारियों तथा चिकित्सालय में आने-जाने वाले मरीजों व उनके तीमारदारों को पेयजल के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। स्वास्थ्य केन्द्र परिसर में कर्मचारियों को रहने के लिए आवास, चिकित्सालय में बने आपरेशन थियेटर, चिकित्सक चैंबर, प्रसूति कक्ष व अन्य जगहों पर बने वाशरुम आदि मेंं पेयजलापूर्ति परिसर स्थित पानी टंकी से ही होता था।
अस्पताल परिसर में पानी संग्रह की सुविधा उपलब्ध नहीं है तथा उचित देखरेख के अभाव में तीन वर्ष पूर्व पानीटंकी के खराब होने के चलते परिसर में पेयजल की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है। इस संबंध में महिला चिकित्सक डॉ. शालिनी भाष्कर, फॉर्मासिस्ट हिमालय गिरि, महेंद्र यादव, पप्पू यादव, मीरा सिंह, आशा देवी, अमरनाथ, ओमप्रकाश जायसवाल आदि ने बताया कि पानीटंकी के खराब होने से पेयजल की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है। नंदगंज के सरकारी अस्पताल में इन दिनों पानी का संकट गहरा गया है। पेयजल के लिए तीमारदार तो भटक रहे वहां तैनात कर्मचारियों को भी दो-चार होना पड़ रहा है। सबसे अधिक समस्या तो प्रसूता कक्ष व ओपीडी में हैं, जहां मरीज पानी के लिए रोज परेशान हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि तकरीबन तीन साल से गेट के पास लगी पानीटंकी खराब पड़ी है, ऐसे में लोगों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है। पानीटंकी सही रहने पर पहले अस्पताल में पेयजल की व्यवस्था 24 घंटे अनवरत रहती थी। वहां उपलब्ध दो हैंडपंप मेंं से एक हैंडपंप मरीजों व तीमारदारों का सहारा बना है जिससे गर्मी से व्याकुल लोग प्यास बुझा रहे हैं। प्रसूता वार्ड में तीमारदारों की हमेशा भीड़ रहती है। जब पेयजल के लिए उन्हें संसाधन खोजने पड़ते हैं तो वे परेशान हो जाते हैं। एनपीएचसी नंदगंज में एक ही हैंडपंप हैं ऐसे में मरीजों को पानी के लिए अन्यत्र भटकना पड़ रहा है। जरूरत पर लोग बाहर से पानी की बोतल खरीदकर ले आ रहे हैं। उधर प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. बी.के.राय ने बताया कि बिजली रहने पर ही पानी सुलभ हो पाता है, अन्यथा परिसर स्थित दूसरे हैंडपंप से जल की व्यवस्था की जाती है। उन्होंने बताया कि इसकी जानकारी प्रमुख सचिव समेत उच्चाधिकारियों को पूर्व में दी जा चुकी है। सीएमओ कार्यालय से धन की व्यवस्था होने पर पानीटंकी को बदल दिया जाएगा।
योगीराज में जनता क्या करे......
मरीज सागर बिंद ने कहा कि ओपीडी के सामने लगा हैंडपंप पानी नहीं दे रहा है। हमें परिसर के बाहर से पानी खरीदकर लाना पड़ा है।
अंजू ने बताया कि पानीटंकी के खराब होने से परिसर में प्रसूताओं हेतु पेयजल व शौच की समस्या पैदा हो गई है।
मरीज बिरजू प्रसाद के अनुसार स्वास्थ्य केन्द्र परिसर मेंं वाटर स्टोरेज की सुविधा अनुपलब्ध है। दो हैंडपंप मेंं एक खराब पड़ा है तो दूसरे से आर्सेनिक युक्त जल आ रहा है। ऐसी स्थिति में एनपीएचसी परिसर के बाहर से पानी लाना पड़ता है।
मरीज के तीमारदार हीरावन पटवा ने बताया कि आज उन्हें पेयजल के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है, जबकि पूर्व में पानीटंकी सही रहने पर 24 घंटे पानी की सुविधा स्वास्थ्य केंद्र पर रहती थी।
प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. बी.के.राय ने पानी-टंकी खराब होने की वजह से पेयजल संकट गहराने के संदर्भ में बताया कि इसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों को दी जा चुकी है।
रिपोर्ट: विवेक सिंह
अस्पताल परिसर में पानी संग्रह की सुविधा उपलब्ध नहीं है तथा उचित देखरेख के अभाव में तीन वर्ष पूर्व पानीटंकी के खराब होने के चलते परिसर में पेयजल की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है। इस संबंध में महिला चिकित्सक डॉ. शालिनी भाष्कर, फॉर्मासिस्ट हिमालय गिरि, महेंद्र यादव, पप्पू यादव, मीरा सिंह, आशा देवी, अमरनाथ, ओमप्रकाश जायसवाल आदि ने बताया कि पानीटंकी के खराब होने से पेयजल की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है। नंदगंज के सरकारी अस्पताल में इन दिनों पानी का संकट गहरा गया है। पेयजल के लिए तीमारदार तो भटक रहे वहां तैनात कर्मचारियों को भी दो-चार होना पड़ रहा है। सबसे अधिक समस्या तो प्रसूता कक्ष व ओपीडी में हैं, जहां मरीज पानी के लिए रोज परेशान हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि तकरीबन तीन साल से गेट के पास लगी पानीटंकी खराब पड़ी है, ऐसे में लोगों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है। पानीटंकी सही रहने पर पहले अस्पताल में पेयजल की व्यवस्था 24 घंटे अनवरत रहती थी। वहां उपलब्ध दो हैंडपंप मेंं से एक हैंडपंप मरीजों व तीमारदारों का सहारा बना है जिससे गर्मी से व्याकुल लोग प्यास बुझा रहे हैं। प्रसूता वार्ड में तीमारदारों की हमेशा भीड़ रहती है। जब पेयजल के लिए उन्हें संसाधन खोजने पड़ते हैं तो वे परेशान हो जाते हैं। एनपीएचसी नंदगंज में एक ही हैंडपंप हैं ऐसे में मरीजों को पानी के लिए अन्यत्र भटकना पड़ रहा है। जरूरत पर लोग बाहर से पानी की बोतल खरीदकर ले आ रहे हैं। उधर प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. बी.के.राय ने बताया कि बिजली रहने पर ही पानी सुलभ हो पाता है, अन्यथा परिसर स्थित दूसरे हैंडपंप से जल की व्यवस्था की जाती है। उन्होंने बताया कि इसकी जानकारी प्रमुख सचिव समेत उच्चाधिकारियों को पूर्व में दी जा चुकी है। सीएमओ कार्यालय से धन की व्यवस्था होने पर पानीटंकी को बदल दिया जाएगा।
योगीराज में जनता क्या करे......
मरीज सागर बिंद ने कहा कि ओपीडी के सामने लगा हैंडपंप पानी नहीं दे रहा है। हमें परिसर के बाहर से पानी खरीदकर लाना पड़ा है।
अंजू ने बताया कि पानीटंकी के खराब होने से परिसर में प्रसूताओं हेतु पेयजल व शौच की समस्या पैदा हो गई है।
मरीज बिरजू प्रसाद के अनुसार स्वास्थ्य केन्द्र परिसर मेंं वाटर स्टोरेज की सुविधा अनुपलब्ध है। दो हैंडपंप मेंं एक खराब पड़ा है तो दूसरे से आर्सेनिक युक्त जल आ रहा है। ऐसी स्थिति में एनपीएचसी परिसर के बाहर से पानी लाना पड़ता है।
मरीज के तीमारदार हीरावन पटवा ने बताया कि आज उन्हें पेयजल के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है, जबकि पूर्व में पानीटंकी सही रहने पर 24 घंटे पानी की सुविधा स्वास्थ्य केंद्र पर रहती थी।
प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. बी.के.राय ने पानी-टंकी खराब होने की वजह से पेयजल संकट गहराने के संदर्भ में बताया कि इसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों को दी जा चुकी है।
रिपोर्ट: विवेक सिंह








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