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Wednesday, April 11, 2018

तो गंगा में समा जाएगा ये गांव.....

गाजीपुर: कहा जाता है कि नदियों के किनारे सभ्यताएं बसती हैं। वहीं दूसरी तरफ गंगा के किनारे बसे शहर व गांव कुछ अलग ही महत्व रखते हैं। यहां के लोग अपने आपको सौभाग्यशाली समझते हैं। जिसका सांस्कृतिक व धार्मिक आधार भी रहा है। गंगा नदी के किनारे बसा गाजीपुर जनपद में शेरपुर ग्रामसभा का सेमरा व शिवरायकापुरा नदी के अभिशाप को दशकों से झेलते-झेलते अब अंतिम मुहाने पर खड़ा है। आनी वाली बरसात वहां के लोगों के लिए अभिशाप बन जाए या फिर उनके भगौलिक संरचना को इतिहास में बदल दे, यह तय होना बाकी है। इन दोनों गांवों के लगभग 70 प्रतिशत रिहायशी इलाके गंगा में समाहित हो चुके हैं। कटान की विभीषिका देखकर नदी के मुहाने पर खड़े ग्रामीणों के जेहन में बरसात का वह भय बरबस क्रौंधता रहता है। अपने बचाव के लिए ग्रामीणों ने लगातार संघर्ष जारी रखा है, लेकिन कोई निष्कर्ष निकलता दिखाई नहीं दे रहा है। वैसे तो कटान लगभग 15 वर्षों से हो रहा है। 2010 से नदी गांव की आबादी में घुस आयी है। सबसे भयावह मंजर वर्ष 2013 का रहा है। इस वर्ष 400 रिहायशी मकान गंगा की कटान की भेंट चढ़ गये थे। अभी भी विस्थापित सरकारी स्कूलों व सार्वजनिक स्थानों पर विस्थापन का दंश झेल रहे हैं। सरकार अगर इसी तरह से निरंकुश रही तो इस वर्ष सेमरा का अस्तित्व खत्म होना तय है।
नेताओं ने खूब की कोशिश लेकिन नहीं बनती दिख रही बात
सेमरा कटान को लेकर जनप्रतिनिधि काफी प्रयासरत रहे हैं। स्थानिय विधायक अलका राय लगातार मुख्यमंत्री के दरबार में गुहार लगा रही हैं। सोमवार को विधायक ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर सेमरा को बचाने के लिए धन आवंटित कराने का आग्रह किया। इससे पूर्व भी वह तीन बार मुख्यमंत्री व सिंचाई मंत्री से मिल चुकी हैं। उनके प्रतिनिधि आनंद राय मुन्ना ने बेबाक मीडिया को दुरभाष पर बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आश्वासन दिया है कि एक सप्ताह के अंदर धन आवंटित कर दिया जाएगा। बता दें कि पिछले वित्तिय वर्ष में ही सेमरा को कटान से रोकने के लिए लगभग 12 करोड़ का टेंडर सिंचाई विभाग के द्वारा कराया गया था, जिस पर अभी तक कोई धन आवंटित नहीं हुआ है। इससे पूर्व बलिया के सांसद भरत सिंह भी सेमरा व शेरपुर के कटान को रोकने के लिए संसद में प्रश्न उठा चुके थे। उन्होंने कहा था कि शेरपुर एक ऐतिहासिक गांव है जिसे बचाना इस देश की सरकार का कर्तव्य है। वहां के लोगों ने इस देश की आजादी में कुर्बानी देकर अपने सुनहरे इतिहास को संजोया है। अगर हम और यह सरकार इसे बचा नहीं सकती तो आना वाला इतिहास हम लोगों को माफ नहीं करेगा। इसके बावजूद भी अब सेमरा इस मुहाने पर खड़ा है कि पैसा आने के बाद भी बचा पाना दिन पर दिन मुश्किल दिख रहा है। अप्रैल का महीना बितता जा रहा है। मई में बजट आवंटित होने के बाद भी कार्य को पूर्ण करना चुनौती हो जाएगी। जून से नदी के पानी का बढ़ाव जारी हो जाता है। जिसमें काम करना नामुमकिन होगा।
जल्द शुरू होगा कार्य
देवकली पंप कैनाल द्वितीय के अधिशासी अभियंता राजेश शर्मा ने बताया कि प्रमुख सचिव सिंचाई की बैठक में सेमरा के कटान का मामला प्रमुख रहा। उन्होंने बताया कि जल्द ही धन आवंटित होगा और कार्य को समय रहते पूरा कराया जाएगा। अभी तक इस प्रोजेक्ट के लिए कोई पैसा नहीं आया है।


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