मीडिया की स्वतंत्रता पर हमला कत्तई बर्दाश्त नहीं करेंगे पत्रकार
माफियाओं के बुने जाल में उलझा प्रशासन, पत्रकारों की सुरक्षा को खतरा
चंदौली। प्रदेश में पत्रकारों की हत्याओं का सिलसिला थम नहीं रहा है। अपराधियों, भू एवं शराब माफियाओं के खिलाफ आवाज बुलंद करने पर हर हफ्ते किसी न किसी पत्रकार को जान गवांनी पड़ जा रही है। ऐसे हालात में लोकतंत्र का चौथे स्तंभ की सुरक्षा खतरे में है। इसलिए अब सरकार को चाहिए कि वह प्रदेश में पत्रकारों की सुरक्षा के लिए जल्द कानून बनाये और उसे लागू करे। उक्त विचार यूपी जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष दीपक सिंह ने व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि शराब माफियाओं के विरुद्ध खबर छपाने पर प्रतापगढ़ जिले में पत्रकार सुलभ श्रीवास्तव की हत्या कर दी गई। और घटना को दुर्घटना का रूप देने की साजिश शुरू हो गई। दुर्भाग्य इन बात का है कि पुलिस के अधिकारी भी उन्हीं माफियाओं के बुने जाल में उलझ कर घटना को सामान्य दुर्घटना साबित करने में जुटे रहे। लेकिन अब इसे और बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। सरकार ने यदि अब भी इस ओर ध्यान नहीं दिया तो पत्रकार भी करो या मरो का अभियान आरंभ करने को बाध्य होंगे। श्री सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग किया कि वे प्रदेश में कानून का शासन बहाल करें। और पत्रकारों की सुरक्षा के लिए अलग से कानून बनाये तथा उसे जल्द लागू करें। ताकि अब और किसी निर्दोष एवं बेबाक पत्रकार को न्याय की जंग में अपनी जान न गंवानी पड़े। अन्यथा अब इसे और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस दौरान प्रदेश कोषाध्यक्ष संतोष यादव, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य सरदार महेंद्र सिंह, जिला महामंत्री गौरव श्रीवास्तव, संगठन मंत्री न्याज अहमद खां, राजेश जायसवाल, हरिओम आनंद, अरविंद पटवा, आशाराम यादव, चन्द्रजीत पटेल, आरिफ हाशमी, अजय राजपूत, आशुतोष मिश्रा, सुभाष मौर्य, महताब आलम, बृजेश केशरी आदि अन्य पत्रकारो ने भी मांगो को लेकर अपनी अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

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