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Saturday, July 17, 2021

मंच की महिलाओं ने उ०प्र० जनसंख्या नियंत्रण कानून पर की बैठक

                  चन्दौली महिला स्वास्थ्य अधिकार मंच व नागरिक अधिकार मंच के बैनर तले नौगढ़ क्षेत्र के तेंदुआ, लालतापुर, बसौली,हनुमानपुर देउरा में बैठक की गयी।जिसमें जनसंख्या नियंत्रण के उद्द्देश्य से उत्तर प्रदेश राज्य विधि आयोग द्वारा उत्तर प्रदेश जनसंख्या विधेयक 2021 का ड्राफ्ट तैयार किया गया है। जिसपर आम जनता से 19 जुलाई तक राय माँगी गई है। उत्तर प्रदेश का राज्य विधि आयोग जनता की राय पर विचार करने के बाद उसे राज्य सरकार को सौंपा जाएगा । इस ड्राफ़्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश में जनसंख्या नियंत्रण के लिए दो या दो से कम बच्चे वाले अभिभावकों को तमाम सुविधाएं दिया जाना प्रस्तावित है जबकि दो से अधिक बच्चे वाले अभिभावकों को कई सुविधाओं से वंचित करने का प्रस्ताव है। प्रदेश सरकार द्वारा प्रस्तावित इस जनसंख्या विधेयक का समुदाय में किस वर्ग पर क्या प्रभाव पड़ेगा यह विचार करने योग्य है।यदि इसका विश्लेषण करें तो यह विदित होता है कि इस विधेयक के लागू होने से हाशिये पर रहने वाले लोगों की स्थिति और अधिक विकट हो जाएगी। राज्य सरकार का यह दावा है कि यह कदम प्रजनन दर को कम करके प्रदेश की जनसंख्या को स्थिर करने में सहायक सिद्ध होगा।किसी भी महिला द्वारा उसके पूरे प्रजनन काल मे पैदा होने वाले बच्चों ककी संख्या को हम प्रजनन दर कहते है। देश की जनसंख्या स्थिर रहने के लिए कुल प्रजनन दर का 2.1 होना आवश्यक है। NFHS 2 के आंकड़े बताते है कि उत्तर प्रदेश में प्रजनन दर वर्ष 2005-6 में  3.8 थी जो वर्ष 2015-16 में घट कर 2.7 हो गई है। आकड़ों से सिद्ध होता है कि राज्य के युवा दंपतियों में पहले से काफी कम बच्चे हो रहे है और वर्तमान में जिस गति से प्रजनन दर घट रही है, अतः बिना किसी अधिक प्रयास के भी इसके कम होने की संभावना है।इस प्रकार इस बिल के आने से सबसे ज्यादा असर युवाओं पर पड़ेगा। वह अपने संविधान के तहत मौलिक अधिकारों से वंचित हो जायेगे। खासकर वह युवा जिसका तीसरा बच्चा इस कानून के पारित होने के बाद होगा।हमारे प्रदेश में युवाओं का प्रतिशत 39 है और वह युवा जो हमारे देश की जीडीपी में 34 प्रतिशत का योगदान देते है। इस कानून के पारित होने के बाद वह सरकारी नौकरी , नेतृत्व की भूमिका से वंचित हो जाएंगे जो चिंता जनक स्थिति होगी।इसी के साथ हाशिये पर रह रहे समुदाय की स्थिति और विकट हो जाएगी क्योकि यह वह वर्ग है जिसे पहले ही महामारी के चलते राशन , पोषण, रोजगार, शिक्षा की सुविधओं का उचित लाभ नही मिल पाया है। दो से अधिक बच्चा होने की स्थिति में वह इन सुविधाओं से और भी वंचित हो जायेगे।एक बच्चा व दो बच्चा लेन के दबाव के कारण महिलाओं पर लड़का पैदा करने का दबाव पहले से अधिक होगा जिससे लिंग जाँच आधारित गर्भ समापन की संभावना बढ़ेगी।इस विधेयक के माध्यम से महिला व पुरुष नसबन्दी पर जोर दिया जाएगा जिसके लिए विभन्न लाभ लेने के लिए उन्हें नसबन्दी का प्रमाणपत्र दिखना  होगा। प्रजनन डर को कम करने के लिए इस विधेयक के अनुसार जो मानदंड कपर खरे नही उतरेंगे उन्हें दंड स्वरूप विभन्न योजनाओं तथा मूलभूत सुविधाओं के लाभ से वंचित किया जाएगा। इसका सीधा प्रभाव 2 बच्चे के बाद पैदा होने वाले बच्चे और उनके माता पिता पर पड़ेगा जिन्हें किसी भी सरकारी योजना का लाभ नही मिलेगा जो उनके मौलिक अधिकार का हनन होगा।अतः इस विधेयक को कानून में बदलने से पहले गहन विश्लेषण और व्यापक जान चर्चा की आवश्यकता है। नागरिक संवाद मंच उत्तर प्रदेश की ओर से यह पुरजोर मांग की जा रही है कि कोविड के भयानक महामारी से जूझ रही प्रदेश की जनता के हित को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश राज्य विधि आयोग और राज्य सरकार को इस विधेयक को निरस्त करने चाहिये।बैठक में रामरती,आशा,सुमन,सुशीला,रेखा,मराछी,प्यारी,परमशीला,सीमा,शान्ति आदि महिलाएं मौजूद रही।



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