रिपोर्ट-त्रिपुरारी यादव
वाराणसी रोहनिया- अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद काशी जिला द्वारा जननायक बिरसा मुंडा की जन्म जयंती के अवसर पर लाल बहादुर शास्त्री इंटर कॉलेज दरेखू में संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी को संबोधित करते हुए जिला संगठन मंत्री सौर भेंद्र विक्रम ने बताया कि बिरसा मुंडा एक जनजाति समाज से आते थे। उन्होंने आजादी की लड़ाई में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, विद्यार्थी परिषद के विनय पांडेय ने बताया कि 1 अक्टूबर 1894 को बिरसा मुंडा नौजवान नेता के रूप में सभी मुंडाओं को एकत्र कर इन्होंने अंग्रेजो से लगान माफी के लिये आन्दोलन किया। मुंडा विद्रोह को उलगुलान नाम से भी जाना जाता है। 1895 में उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया और हजारीबाग केन्द्रीय कारागार में दो साल के कारावास की सजा दी गयी। लेकिन बिरसा और उसके शिष्यों ने क्षेत्र की अकाल पीड़ित जनता की सहायता करने की ठान रखी थी और जिससे उन्होंने अपने जीवन काल में ही एक महापुरुष का दर्जा पाया। उन्हें उस इलाके के लोग "धरती आबा" के नाम से पुकारे और पूजा करते थे। उनके प्रभाव की वृद्धि के बाद पूरे इलाके के मुंडाओं में संगठित होने की चेतना जागी। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रधानाचार्य फूल चंद्र पटेल ने की एवं संगोष्ठी का संचालन गंगापुर परिसर प्रतिनिधि अध्यक्ष पदमनाभ म मिश्रा ने किया इस दौरान सैकड़ों छात्र छात्राओं ने इस कार्यक्रम में सभा किया और बिरसा मुंडा के बारे में जाना ।
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