रिपोर्ट-त्रिपुरारी यादव
वाराणसी रोहनिया- अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस की पूर्व संध्या पर लोक समिति कार्यकर्ता और दिहाड़ी मजदूरों ने गुरुवार को बीरभानपुर गाँव में मशाल जुलूस निकाला। सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण गाँव के पंचायत भवन पर एकत्रित होकर सभा किए फिर हाथ में मशाल लेकर तख्ती, बैनर के साथ गाँव की विभिन्न बस्तियों में रैली निकाले। इस दौरान लोगों ने रोटी कपड़ा और मकान, माँग रहा मजदूर किसान,भीख नही अधिकार चाहिये जीने का सम्मान चाहिए, जुल्म करेंगे नही जुल्म सहेंगें नही आदि नारे लगाकर मानवाधिकार के प्रति ग्रामीणों को जागरूग किया। सभा में मजदूरों ने कहा कि सभी को बिना भेदभाव के जीने का अधिकारी होना चाहिए। कोरोना महामारी के समय में देश का सबसे बड़ा तबका मजदूर कोरोना से तो लड़ ही रहा है, पर उसके साथ-साथ अत्याचार,भय, भूख और रोज़गार के संकट से भी जूझ रहा है। हम सभी जानते हैं कि कुल मजदूरों के 93% प्रतिशत मजदूर असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं, जिनकी कोई सामाजिक सुरक्षा नहीं है. वे गरीबी से भयंकर रूप से लड़ रहे हैं. जिनके मानवाधिकारों की रक्षा करना जरुरी है।
इस अवसर पर लोक समिति संयोजक नन्दलाल मास्टर ने कहा कि मानवाधिकार यह सुनिश्चित करता है कि हर व्यक्ति को भोजन के साथ सम्मान मिले. देश में संविधान के अनुसार बिना किसी भेदभाव के समान अधिकार एवं समान अवसर उपलब्ध कराए जाएं. आज पूरे विश्व में मानवाधिकारों का हनन हो रहा है।इसका प्रमुख कारण मानव अधिकारों के प्रति अनभिज्ञ होना है. सरकार को चाहिए कि मानवाधिकारों के प्रति जागरूकता अभियान चलाए. संयुक्त राष्ट्र महासभा में अंतर्राष्ट्रीय मानवधिकार दिवस की 10 दिसंबर 1948 की घोषण की थी. यह एक सार्वभौमिक घोषणा पत्र है, जो मानव अधिकारों के प्रति लड़ाई लड़ता है. मानवाधिकार दिवस मनाने का मुख्य उद्देशय लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना है।कार्यक्रम में मुख्यरूप से सुबास राजभर, शिया राम,ऋषि कुमार,लालमन,श्रीप्रकाश,गीता, ऊषा, उर्मिला,रेखा, रीना,सबिता,दिलीप,रवि, कमलेश, प्रकाश सिंह, सपना, मीरा, चंदा,सुनील,मनीष, श्यामसुन्दर,रामबचन,शिवकुमार,सोनी,सरोज,आशा,अनीता,अरविन्द,आलोक,नन्दलाल मास्टर,पंचमुखी,प्रेमा आदि लोग शामिल रहे। कार्यक्रम का संचालन दिहाड़ी मजदूर संगठन संयोजक रामबचन,अध्यक्षता दिहाड़ी मजदूर संगठन के अध्यक्ष सरोज और धन्यवाद शिवकुमार ने किया।
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