लखनऊ यूपी, भाकपा (माले) ने रविवार को संसद में पेश किए गए मोदी सरकार के वर्ष 2026-27 के आम बजट को अब तक का सबसे खराब जनविरोधी, खोखला व निराशाजनक बजट कहा है।पार्टी के राज्य सचिव सुधाकर यादव ने कहा कि इस बजट में भी मजदूरों, खेती व किसानों, युवाओं और महिलाओं की अनदेखी जारी है। आदिवासियों व गरीबों के बड़े पैमाने पर विस्थापन और पर्यावरण के विनाश को बढ़ावा देने वाला है। बढ़ती असमानता, बेरोजगारी और जनता की घटती क्रयशक्ति का कोई उपाय नहीं है। अमीर परस्त बजट है। यह 'विकसित भारत' की खोखली बातें करता है, जबकि भारतीय अर्थव्यवस्था, लड़खड़ाता रुपया, लोगों की जिंदगी और रोजी-रोटी पर गहरे संकट हैं।उन्होंने कहा कि जरूरी सामाजिक सुरक्षा और गरीबी हटाने वाली योजनाओं के लिए बजट आवंटन या तो कम कर दिए गए हैं या उन्हें स्थिर रहने दिया गया है, जो महंगाई और बढ़ती आबादी की जरूरतों के अनुरुप नहीं है। स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए बजट में किया गया आवंटन असल जरूरतों से बहुत कम है। हेल्थ सेक्टर में बजट निजी क्षेत्र को बढ़ावा देने वाला है। कृषि क्षेत्र की जरूरतों को नजरअंदाज किया गया है। भारतीय उद्योगों पर ट्रंप के टैरिफ के कारण हुए बड़े पैमाने पर रोजगार हानि से निपटने के लिए कोई उपाय नहीं किया गया है। माले नेता ने कहा कि हमें ऐसी नीतियां चाहिए जो सामाजिक कल्याण को बढ़ाए, जनस्वास्थ्य और शिक्षा को मजबूत करे, ग्रामीण अधिरचना में निवेश को बढ़ावा दे, घर और रोजगार की गारंटी करे और देश के मजदूरों, किसानों व युवाओं की आर्थिक-सामाजिक सुरक्षा बढ़ाए। इस कसौटी पर यह बजट बेहद निराशाजनक है।
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