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Sunday, May 31, 2026

बुद्ध धम्म देशना (कथा) के तीसरे दिन भंते वन्दना ने सुनाईं विवाह की कहानी

कथा के दौरान पंचशील के अलग-अलग रंगों के फहराये गए झंडे

चकिया चन्दौली क्षेत्र के सैदूपुर में पांच दिवसीय संगीतमय सनातनी बुद्ध धम्म देशना (कथा) के तीसरे दिन बोध गया से पधारी कथा वाचिका भंते वन्दना ने सिद्धार्थ (गौतम बुद्ध) के शादी का वर्णन बड़े ही मनोरम ढ़ंग से प्रस्तुत किया।कथा के दूसरे दिन उन्होंने सिद्धार्थ (बुद्ध)के जन्मोत्सव की कथा सुनाई थीं। शनिवार को कथा स्थल पर बुद्ध की कथा सुनने के लिए सैकड़ों महिला पुरूष मौजूद थे। उन्होंने कथा के दौरान एक प्रसंग में कहा कि एक बार सिद्धार्थ (बुद्ध जी) अषाढ़ी कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे उनके साथ के लोग खाने पीने में व्यस्त थे लेकिन वे एक पेड़ के नीचे बैठ कर अध्यात्म में डूबे थे,वे खेत की तरफ देख रहे थे तभी एक चीटी उन्हें दिखी, उसी दौरान एक छिपकली आई और चीटी को निकल गई, थोड़ी ही देर में कहीं से घुमाता हुआ एक सांप आया और वह छिपकली को निवाला बना लिया, आकाश में उड़ते हुए एक बाज ने जब सांप देखा तो वह एक ही झपट्टे में सांप को लेकर उड़ गया। सिद्धार्थ ने देखा कि बड़े जीव छोटे जीवों को इस तरह निवाला बना रहे हैं तो उनका मन करूणा से भर गया। सिद्धार्थ जब बुद्ध बने तो उन्होंने जीवन में घटित होने वाली घटनाओं को अपने उपदेशों में शामिल किया और करूणा,विनम्रता,शान्ति,अंहिसा और ध्यान के तरफ लोगों को उत्प्रेरित किया।बुद्ध के यह संदेश विश्व के कई देशों में गए और लोगों ने उसे अपनाया। लोगों के जीवन को जीने के लिए उन्होंने पंचशील और अष्टांगिक मार्ग को बताया।कथा के दौरान भंते वन्दना ने कई शिक्षा प्रद कहानियों का भी वर्णन किया।बाद में उन्होंने सिद्धार्थ (बुद्ध)के विवाह की कहानी का वर्णन सुनाया।कथा शुरू होने से पहले भंते बुद्ध प्रकाश और वहां मौजूद लोगों ने बुद्ध वन्दना की तत्पश्चात पंचशील के अलग-अलग रंग के लगे झंडे को फहराया गया।इस मौके पर मनगोई बौद्ध, गौरीशंकर मौर्य,लालजी,मनीराम,रमेश मौर्य, शशिकांत कुशवाहा,परमानन्द मौर्य, भृगुनाथ विश्वकर्मा,राम अवतार मौर्य,गीता शुक्ला, नन्दलाल शास्त्री,सुभाष खरवार,चंदन कुमार सहित सैकड़ों श्रोता मौजूद रहे।



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