जातिगत जनगणना के महत्व व आवश्यकता पर डाला प्रकाश
रिपोर्ट-मिथिलेश कुमार
चंदौली। नगर के अम्बेडकर नगर वार्ड स्थित अम्बेडकर वाचनालय में जाति आधारित जनगणना को लेकर बैठक हुई। इस दौरान जातिगत जनगणना संयुक्त मोर्चा ने जाति आधारित जनगणना के महत्व एवं उसकी आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया। कहा गया कि पिछड़ों को उनके जनगणना के सापेक्ष आरक्षण व अन्य सुविधाएं तभी प्रदत्त होंगी,जब सरकार जाति आधारित जनगणना कराए। यही संयुक्त मोर्चा की मांग है और इस मांग को मनवाने के लिए संयुक्त मोर्चा जनजागरूकता व जन समर्थन एकत्रित कर रहा है ताकि सरकार इस मांग पर गंभीरता से विचार करे और जातिगण जनगणना कराने को विवश हो। इस दरम्यान क्षेत्रीय बुद्धिजीवियों, सामाजिक न्याय के पक्षकार व प्रबुद्धजनों ने अपने तर्क व विचारों को मजबूती के साथ रखा।इस दौरान मनीष शर्मा ने कहा कि जाति की जनगणना बहुत बड़ा सवाल है।आजादी के बाद तमाम विचार धारा की सरकार आयी लेकिन किसी ने इस पर गम्भीरता से नहीं सोचा।कहा कि यह केवल ओबीसी जनगणना का सवाल नहीं है यह 70 प्रतिशत आबादी को न्याय से वंचित करने का
मामला है। बिना जाति जनगणना के ओबीसी बिल बहुत खतरनाक है। प्रेमप्रकाश सिंह यादव ने कहा कि जाति आधारित जनगणना सभी तालों की चाभी है। जब जनगणना होगा, तभी पिछड़ी जातियों को उचित प्रतिनिधि व लाभ मिलने का रास्ता खुलेगा। ओबीसी में पुरुषों और महिलाओं की साक्षरता दर कितनी है? लिंगानुपात कितना है? शिक्षा कितने लोगों तक पहुंच पायी ? ओबीसी में कौन स्कूल और स्नातक की पढ़ाई पूरा कर पा रहा है यह जाति जनगणना से स्पष्ट हो जाएगा। वही अनूप श्रमिक ने कहा कि जब तक ओबीसी की जनगणना नहीं होती है तब तक ओबीसी के हित के लिए किसी भी तरह की योजना सरकार नहीं बना पाएगी और न ही इन पिछड़ी जातियों का कभी भला हो पाएगा। बैठक मे जफिर अहमद प्रधान, इबरार अली, अवीनाश लखन, गुडलक भारती, सुनील भारती, अर्चना देवी, राजकुमार, राजेश कुमार ,पंकज कुमार, फूलचंद, सूबेदार, मदन राम भारती, अजय भारती, मिथिलेश कुमार, अभिषेक कुमार, जयप्रकाश, रतन लाल, जालंधर, बांके लाल, सुजीत कुमार, सोहन आदि उपस्थित रहे। अध्यक्षता बदरुद्दूजा अंसारी व कार्यक्रम का संचालन रतीश कुमार ने किया।

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