चकिया चंदौली, अखिल भारतीय अनुसूचित जाति/ जन जाति कर्मचारी एसोशिएशन शाखा चकिया और शहाबगंज के संयुक्त तत्वावधान में स्थानीय एक लॉन में भारत रत्न बोधिसत्व बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी की 135वीं जयंती हर्षोल्लास के साथ निभाई गई। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए अखिल भारतीय अनु. जाति /जनजाति कर्मचारी एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बुद्धमित्र मुसाफिर ने कहा कि बाबा साहब का पूरा जीवन संघर्ष समाज के वंचित वर्गों के लिए समर्पित रहा लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि उन्होंने देश में प्रमुख राष्ट्रीय संस्थाओं जैसे आर बी आई, की स्थापाना, भारतीय संविधान का निर्माण, संविधान के तहत वंचितों के लिए आरक्षण की व्यवस्था, कर्मचारियों के लिए कार्य के घंटों का निर्धारण, महिलाओं के लिए विशेष प्राविधान करके आधुनिक भारत के शिल्पकार के रूप में हमारे सामने आते हैं। उन्होंने आगे कहा कि मान्यवर साहब ने जिस प्रकार से बाबा साहब के मिशन को समझते हुए कार्य करके हमें जगाने का कार्य किया आज पुनः उसकी जरूरत है। अगर हम इस देश में हुक्मरान बनना चाहते हैं तो मान्यवर साहब के पद चिन्हों पर चलना पड़ेगा। साथ ही अपनी माताओं , बहनों को अन्य चीजों से हटकर संविधान की ओर उन्मुख करना पड़ेगा। तभी अगली पीढ़ी सही दिशा में जाएगी। उन्होंने आगामी होने जा रही जनगणना में विशेष रूप से अनुसूचित जाति के लोगों से आग्रह किया कि उसमें धर्म के कालम में ध्यान देकर लिखने का कार्य करें क्योंकि यह हमारा संवैधानिक अधिकार है जून 1990 में संविधान में यह प्रावधान किया जा चुका है कि यदि अनुसूचित जाति के लोग बौद्ध धर्म स्वीकारा करते हैं तो उनकी एस सी की आईडेंटिटी सुरक्षित रहेगी और उनके आरक्षण का अधिकार पूरी तरह सुरक्षित रहेगा। हमें इसे एक अभियान के रूप में चलाना होगा।
इस अवसर पर अन्य कई वक्ताओं के भी अपने विचार रखे। जिसमें मुख्य वक्ता डॉ रवि कुमार ने कहा कि बाबा साहब भारतीय महिलाओं के लिए जो काम किया वो पूरी दुनिया के लिए एक नज़ीर है। देश में वंचित वर्ग में महिलाएं भी रही हैं। लेकिन बाबा साहब ने उन्हें बराबरी का सम्मान अधिकार देकर उनके आत्मसम्मान को बढ़ाने का जो कार्य किया है वो अद्वितीय है। इसलिए विशेष रूप से महिलाओं को बाबा साहब का पहले सम्मान करना चाहिए।
इस अवसर पर विशिष्ट वक्ता के रूप में बोलते हुए दिनेश चंद्र ने कहा कि आज देश का जो माहौल है आप कल्पना करिए अगर बाबा साहब का संविधान नहीं होता तो आमजन की हालत कैसी होती। इसलिए बाबा साहब जितना प्रासंगिक उन्नीसवीं, बीसवीं शताब्दी में थे उतना ही आज भी हैं। इसलिए हमें बाबा साहब के विचारधारा को यूं हीं बढ़ाते रहना है। यह हमारी नैतिक जिम्मेदारी भी है।इस अवसर पर मुख्य रूप से भंते बोधिसरण, सी डी बौद्ध विनोद कुमार, डॉ रवि कुमार, शैलेन्द्र सिंपल, दीपक, राजपति, महेंद्र, एड. रामकृत, सुरेश अकेला, पारस, प्रदीप कुमार, अनिल, अरविंद, अखिलेश, प्यारेलाल, संजीत भारती, अभिमन्यु डॉ रीना, भारती, पोर्सिया अंबेडकर, अजय कुमार सुमन, अरविंद अवस्थी, उपस्थित रहे।अध्यक्षता श्यामलाल, संचालन अजय भारती एवं धन्यवाद ज्ञापन शैलेंद्र सिंपल ने किया।

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