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Friday, May 1, 2026

मई दिवस मजदूर संघर्ष की जीत से सीखने व संघर्षों को आगे बढ़ाने के संकल्प का दिन -वाम दल

चकिया चन्दौली शिकागो के अमर शहीदों को लाल सलाम,1 मई मजदूर दिवस जिंदाबाद,मजदूरों के अधिकारों पर हमले बंद करो,गुलामी का दस्तावेज चार श्रम कोड वापस लो सहित तमाम नारों के साथ,प्रशासन द्वारा जुलूस निकालने से रोकने और वामपंथी नेताओं की गिरफ्तारी के बावजूद स्थानीय काली पोखरे से मार्च करते हुए वामपंथी दलों के नेतृत्व में जूलूस गांधीपार्क पहुंचा तथा सभा हुई।

सभा को संबोधित करते हुए वामपंथी नेताओं ने कहा कि इस हफ़्ते हम पहला ऐसा अंतरराष्ट्रीय मज़दूर दिवस मना रहे हैं जो 1 अप्रैल से मोदी सरकार के नए लेबर कोड थोपे जाने के बाद आया है. ये नए लेबर कोड मज़दूरों के अधिकार बेहतर करने, उनका दायरा बढ़ाने और श्रम कानूनों के पालन को मज़बूत करने के बजाय, भारत के विशाल मज़दूर वर्ग को एक कॉरपोरेट जंगलराज के हवाले कर रहे हैं जहाँ मालिकों की तानाशाही को राज्य का पूरा संरक्षण हासिल है। आठ घंटे का कार्यदिवस अब कोई सार्वभौमिक अधिकार नहीं रह गया है।

वामपंथी नेताओं ने कहा कि काम के घंटों में बढ़ोतरी का मतलब अब ओवरटाइम की मज़दूरी नहीं, बल्कि महज़ अतिरिक्त शोषण है. ट्रेड यूनियन बनाना पहले से कहीं ज़्यादा मुश्किल कर दिया गया है, और सामूहिक सौदेबाज़ी की ताकत को बुरी तरह कमज़ोर किया गया है,वहीं मालिकों को मनमाने ढंग से कर्मचारियों को नौकरी से निकालने के और भी ज़्यादा अधिकार दे दिए गए हैं।इन गुलामी भरे नए क़ानूनों का अमल ठीक उसी दौर में हुआ है, जब अमेरिका–इज़राइल की ईरान के ख़िलाफ़ जंग की वजह से अचानक आर्थिक संकट और भारी उथल-पुथल मच गई है। ईंधन संकट की चपेट में आकर कई उद्योग-धंधों ने अपना उत्पादन घटा दिया है या पूरी तरह बंद हो गए हैं, प्रवासी मज़दूरों को एक बार फिर गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों से मजबूरन अपने घर उत्तर प्रदेश, बिहार, ओडिशा, झारखंड और पश्चिम बंगाल लौटना पड़ रहा है। एनसीआर क्षेत्र और देशभर के औद्योगिक इलाकों में ठेका मज़दूरों के बड़े-बड़े विरोध प्रदर्शन फूट पड़े हैं, जो तत्काल वेतन वृद्धि की माँग कर रहे हैं। कहा गया कि यह समझना मुश्किल नहीं है कि बेहद कम मज़दूरी और असुरक्षा झेल रहे एनसीआर के मज़दूर अब सिर्फ़ ज़िंदा रहने के लिए संघर्ष करने को क्यों मजबूर हैं। लेकिन यूपी की 'डबल इंजन' मोदी–योगी सरकार मज़दूरों के इन आंदोलनों को 'देश-विरोधी साज़िश' करार दे रही है। मज़दूरों की आवाज़ उठाने वाले कार्यकर्ताओं को फँसाने के लिए उन्हें 'मास्टरमाइंड' बताकर गिरफ़्तार किया जा रहा है, और कथित तौर पर मज़दूरों को भड़काने और देश की बदनामी का आरोप लगाया जा रहा है,जहाँ सरकार ने किसानों के आंदोलन पर बर्बर दमन करने की हिम्मत नहीं की थी, वहीं अब वही सरकार मज़दूरों के आंदोलनों को बर्बर बल-प्रयोग से कुचलने पर उतारू है।सभा को खेग्रामस राष्ट्रीय सह सचिव अनिल पासवान,एडवा नेत्री लालनमणि विश्वकर्मा,परमहंस राम,बदरुद्दीन,राजेंद्र यादव, बदरूद्वजा अंसारी,भृगुनाथ,जयनाथ राम सहित तमाम वक्ताओं ने संबोधित किया।अध्यक्षता स्वतंत्रता संग्राम सेनानी राम निवास पाण्डेय ने तथा संचालन लाल चंद एड. ने किया।



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