"विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस"पर महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में कार्यक्रम आयोजित - जनसच न्यूज़

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Sunday, August 14, 2022

"विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस"पर महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में कार्यक्रम आयोजित

                  

वाराणसी वाणिज्य विभाग एवं राष्ट्रीय कैडेट कोर (एन. सी.सी.), महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी के संयुक्त तत्वावधान में विभागाध्यक्ष प्रो0 कृपाशंकर जायसवाल जी की अध्यक्षता में 14 अगस्त की पूर्व संध्या पर ’’विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’’ कार्यक्रम  आयोजित किया गया।कार्यक्रम की शुरूआत करते हुए विभागाध्यक्ष, वाणिज्य विभाग प्रो0 के0एस0 जायसवाल ने कहा कि ’’ इस स्मृति दिवस की मुख्य विषयवस्तु इनके शुरूवाती दो शब्द विभाजन एवं विभीषिका स्वयं इसका वास्तविक अर्थ बतलाती है। 14 अगस्त, 1947 को अंग्रजों ने भारत को टुकड़ों में बांटने की शुरूवात की जिसके परिणाम स्वरूप बीस लाख से ज्यादा लोगों ने अपनी जान गवाईं व लाखों की संख्या में लोग 

प्रताड़ित हुए। अगर भारत का विभाजन न  हुआ होता तो आज भारत को आंख दिखाने की हिमाकत शायद ही कोई करता। डॉ0 मनमोहन सिंह, इन्द्र कुमार अग्रवाल, डॉ0 खुशवन्त सिंह एवं भगत सिंह जैसे कई अनगिनत चेहरों ने तत्कालिक पाकिस्तान में जन्म लिया था जिन्हें इस वीभत्स घटना के फलस्वरूप अपनी मातृभूमि को त्यागना पड़ा। हमें इसे स्मृति के रूप में इसलिए याद करना है ताकि इससे कुछ सीख सकें और भविष्य में सुधारवादी कदम उठा सकें’’।प्रो0 अशोक कुमार मिश्र संकायाध्यक्ष वाणिज्य संकाय ने कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए कहा कि वर्तमान परिवेश में इन दो देशों को एक करना केवल कोरी कल्पना मात्र है। ये ठीक वैसा ही है जैसे पहिये वाले वाहन के साथ बिना पहिये वाले वाहन को साथ ढोना। इन्होंने विस्थापन के कुछ प्रमुख कारक राजनैतिक, क्षेत्रीय विद्रोह एवं प्राकृतिक व भौगोलिक को बतलाया। इन्होंने विस्थापन के प्रमुख प्रभावों की भी विवेचना 

की जिनमें प्राकृतिक सम्पदा की कमी व बेरोजगारी प्रमुख है।प्रो0 सुधीर कुमार शुक्ल ने इस दिवस को मनाने की अपेक्षा यह दिवस क्यूं मनाते हैं पर ध्यान केन्द्रित किया। उन्होंने आगे कहा कि इस स्मृति दिवस के पीछे छुपे मन्तव्य व कृतव्य को जानना ही हमारा प्रमुख उद्देश्य होना चाहिए।कार्यक्रम के अन्त में पूर्व संकायाध्यक्ष वाणिज्य संकाय प्रो0 अजीत कुमार शुक्ल ने कहा कि आज का दिवस पूर्वावलोकन व आत्ममंथन का दिवस है जिसका प्रमुख उद्देश्य शरणार्थियों के द्वारा सही गयी यातनाओं को यादकर उनके प्रति श्रद्धांजली अर्पित करना है। इन्होंने आजादी की पूरी क्रान्तिकारी घटनाओं को विद्यार्थियों के नयन पटल पर प्रस्तुत किया।इस कार्यक्रम को सही दिशा व संचालन व धन्यवाद ज्ञापन डॉ0 धनन्जय विश्वकर्मा जी ने किया। इस कार्यक्रम में विभाग एवं संकाय के सभी आचार्य उपस्थित थे। इस कार्यक्रम में विभाग के सभी छात्र/छात्राओं ने भी अपने विचार प्रस्तुत किये।



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