चन्दौली चकिया ज्ञानेश कुमार को गिरफ्तार करो,SIR को रद्द करो,SIR में काटे गए तमाम नामों को बहाल करो, लोकतंत्र पर हमला नहीं सहेंगे,वोट चोरी नहीं सहेंगे, तानाशाही नहीं सहेंगे,ज्ञानेश कुमार तुम जान लो तेरी बारी आई है,बोरिया बिस्तर बांध लो तेरी बारी आई है नारे के साथ वामपंथी दलों के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर भाकपा(माले) कार्यकर्ताओं ने चकिया लालपुर स्थित पार्टी कार्यालय से उपजिलाधिकारी कार्यालय तक गुरुवार को प्रतिरोध मार्च निकाला तथा राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन उपजिलाधिकारी को सौंपा।उपजिलाधिकारी के ज्ञापन लेने में देरी करने पर माले कार्यकर्ता कार्यालय के पास बैठ गए।इस दौरान सभा को संबोधित करते हुए माले राज्य स्थाई समिति सदस्य सह चंदौली जिला सचिव कामरेड अनिल पासवान ने कहा कि इंडियन एक्सप्रेस अखबार में निर्वाचन आयोग को लेकर छपे रहस्योद्घाटन के बाद मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद पर एक मिनट भी बने रहने का अधिकार नहीं है। उन्हें फौरन इस्तीफा दे देना चाहिए। अगर वे इस्तीफा नहीं देते हैं, तो भाकपा (माले) समेत वामपंथी दल अन्य लोकतांत्रिक व न्यायप्रिय शक्तियों के साथ मिलकर आंदोलन और तेज करेंगे।माले नेता ने कहा कि यह आंदोलन चुनाव आयोग की स्वतंत्रता, विश्वसनीयता तथा मतदान के अधिकार और भारत के चुनावी लोकतंत्र की रक्षा के लिए किया जाएगा।
भाकपा(माले) राज्य कमेटी सदस्य सह चकिया ब्लॉक सचिव कामरेड विजई राम ने कहा कि वाम दलों के देशव्यापी आंदोलन की प्रमुख मांगे हैं : ज्ञानेश कुमार को पद से हटाया जाए। एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए और मतदाता सूचियों से गलत तरीके से बाहर किए गए सभी लोगों का मतदान अधिकार बहाल किया जाए। निर्वाचन आयोग की स्वतंत्र और लोकतांत्रिक कार्यप्रणाली बहाल की जाए।
माले जिला स्थाई समिति सदस्य कामरेड रामायण राम ने कहा कि निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति की मौजूदा व्यवस्था को बदलकर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा प्रस्तावित चयन समिति पर आधारित किया जाए, जिसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश शामिल हों।
आर वाई ए राज्य परिषद सदस कामरेड सुनैना कुमारी ने कहा कि इंडियन एक्सप्रेस के रहस्योद्घाटन के अनुसार त्रिसदस्यीय आयोग के दो सदस्यों - सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी - ने 10 महीनों में 14 बार आयोग द्वारा लिये गए फैसलों का विरोध किया। कई फैसलों से उन्हें अंधेरे में रखा गया और जिनका उन्होंने विरोध किया उनमें नए मतदाताओं के नाम शामिल करने से लेकर नाम हटाने जैसे फैसले शामिल हैं। इसके अलावा, मतदाता सूची के डेटाबेस तक पहुंच को नीचे के अधिकारियों को बाइ पास कर दिल्ली में केंद्रीकृत करने के फैसले का भी उन्होंने विरोध किया था। उन्होंने अपने विरोध को कैबिनेट सचिव तक भी पहुंचाया, लेकिन उसका संज्ञान नहीं लिया गया।
माले नेता कामरेड परमहंस राम ने कहा कि ये रहस्योद्घाटन भारत के निर्वाचन आयोग के कामकाज और उसकी प्रणाली की निष्पक्षता को लेकर भी गंभीर चिंताएं पैदा करते हैं। ये सवाल मुख्य निर्वाचन आयुक्त के पद की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करते हैं और यह भी दिखाते हैं कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त का पद अपनी विश्वसनीयता खो चुका है। जिस निकाय के भीतर लोकतंत्र ही नही बचा, वह भला देशभर में लोकतांत्रिक चुनाव कराने का जिम्मा कैसे उठा सकता है। बहुमत के ऊपर तानाशाही चलाने वाले ऐसे मुख्य निर्वाचन आयुक्त को तुरंत पदत्याग कर देना चाहिए। साथ ही, दोषपूर्ण एसआईआर के आधार पर जो भी चुनाव हुए हैं, उनकी वैधता नहीं रही, लिहाजा उन चुनावों को रद्द किया जाना चाहिए।
प्रतिवाद मार्च में कामरेड रामायण राम धर्मपाल राम,सुदामा राम एपवा नेत्री वैजयंती माला,रामसनेही,शिव लोचन,राधिका देवी,शिव चौहान कमली वनवासी,राम बचन वनवासी,चंद्रभान चौहान समेत तमाम कार्यकर्ता मौजूद रहे।


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